रांची। जैन धर्म के विश्व प्रसिद्ध तीर्थस्थल पारसनाथ पहाड़ और उसके आसपास के संवेदनशील क्षेत्रों के संरक्षण को लेकर झारखंड हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। 'ज्योत' संस्था द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने गिरिडीह के डीसी को स्पष्ट और कड़े निर्देश जारी किए हैं।
अदालत ने साफ कर दिया है कि केवल कागजी रिपोर्ट से काम नहीं चलेगा, प्रशासन को मौके पर जाकर धरातल की हकीकत देखनी होगी।गिरिडीह डीसी को स्वयं पारसनाथ पहाड़ और आसपास के इलाके का दौरा कर स्थल निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है।प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि क्षेत्र में हुए निर्माण कार्य कानूनी रूप से वैध हैं या अवैध।
डीसी को यह भी रिपोर्ट देनी होगी कि इन निर्माण कार्यों के लिए नियमों के तहत आवश्यक स्वीकृति और अनुमति ली गई थी या नहीं।
पूर्व में गिरिडीह जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा दाखिल रिपोर्ट पर कोर्ट ने कहा कि इसमें केवल निर्माण का उल्लेख है, लेकिन उनकी वैधानिकता पर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
गिरिडीह डीसी को स्थल निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर 3 सितंबर तक हाईकोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा।
मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर तय की गई है।
पारसनाथ पहाड़ न केवल जैन समाज का एक अत्यंत पवित्र और प्रमुख तीर्थस्थल है, बल्कि यह प्राकृतिक, पर्यावरणीय और पारिस्थितिकीय दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। पिछले कुछ समय से यहाँ नियमों के विपरीत हो रहे अनियंत्रित निर्माण कार्यों को लेकर चिंता जताई जा रही थी। जनहित याचिका के माध्यम से इस पावन स्थल के संरक्षण की गुहार लगाई गई है।
