​रांची। एमएमडीआर (खान एवं खनिज) संशोधन एक्ट 2026 को लेकर झारखंड में सियासी पारा चढ़ गया है। राज्य सरकार द्वारा इस कानून के लगातार किए जा रहे विरोध पर केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने जोरदार पलटवार किया है। शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल (झामुमो, कांग्रेस और राजद) अपने निजी खजाने को भरने में आ रही रुकावट के कारण इसका निरर्थक विरोध कर रहे हैं और जनता के बीच झूठ व भ्रम फैला रहे हैं।

​केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह एक्ट लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो चुका है। इसके लागू होने से कोयले और अन्य खनिजों के अवैध कारोबार व तस्करी पर कड़ी रोक लगी है। गृह मंत्री की पहल से कोयला चोरी से होने वाली काली कमाई बंद हो रही है, जिससे राज्य सरकार में छटपटाहट है। उन्हें राज्य के खजाने की चिंता नहीं, बल्कि अपनी काली कमाई के नुकसान का डर सता रहा है।

अन्नपूर्णा देवी ने एक्ट को “झारखंड विरोधी” बताए जाने के दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ​यह पूरे देश के लिए एक समान राष्ट्रीय कानून है, केवल झारखंड के लिए नहीं।​करीब 90% खनन राजस्व का हिस्सा राज्यों के पास ही रहेगा।​इसका मुख्य उद्देश्य राज्यों का राजस्व छीनना नहीं, बल्कि खनन क्षेत्र में एक पारदर्शी और स्थिर व्यवस्था बनाना है।

मंत्री ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध प्रदेश है, लेकिन खदानें चालू न होने से इसका लाभ नहीं मिल पा रहा। पड़ोसी राज्य ओडिशा और पश्चिम बंगाल इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, जबकि झारखंड में सिर्फ विरोध और भ्रम का माहौल है, जिससे निवेश और रोजगार प्रभावित हो रहा है।

​उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस शासित राज्यों—केरल, हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक—सहित देश के किसी भी अन्य हिस्से में इस कानून का विरोध नहीं हो रहा है, केवल झारखंड के सत्तारूढ़ दल ही इससे बिलबिला रहे हैं। यह संशोधन माइनिंग कारोबारियों के लिए पारदर्शी माहौल बनाएगा और राज्यों की मनमानी खत्म कर 'विकसित भारत' के निर्माण में सहायक सिद्ध होगा।