​राँची। लोक भवन में भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के तहत भारत में उच्च शिक्षा और शोध कर रहे विभिन्न देशों के विद्यार्थियों व शोधार्थियों के लिए एक विशेष संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखण्ड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने कहा कि भारत प्राचीन काल से ही ज्ञान और शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र रहा है। तक्षशिला, नालंदा तथा विक्रमशिला जैसे ऐतिहासिक शिक्षा केंद्रों की परंपरा आज भी देश को प्रेरित करती है।

​राज्यपाल ने श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, इराक तथा विभिन्न अफ्रीकी और मध्य-पूर्व के देशों से आए विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए कहा कि उनका भारत में अध्ययन करना दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते शैक्षणिक व सांस्कृतिक संबंधों का जीवंत प्रतीक है। भारत “वसुधैव कुटुम्बकम्” के शाश्वत विचार में विश्वास रखता है। ज्ञान और विचार-विमर्श देशों के बीच सेतु का निर्माण कर लोगों को करीब लाते हैं। भगवान बुद्ध और भगवान महावीर की इस पवित्र भूमि ने पूरे विश्व को शांति, करुणा, अहिंसा और सद्भाव का मार्ग दिखाया है, जो आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हैं।

राज्यपाल ने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के बढ़ते महत्व पर जोर देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत 'विकसित भारत' के संकल्प के साथ तेज़ी से प्रगति कर रहा है। नई दिल्ली में भारत की अध्यक्षता में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह वैश्विक मंचों पर भारत की सक्रिय और निर्णायक सहभागिता को दर्शाता है।

​झारखण्ड के गौरवशाली इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह राज्य अपनी समृद्ध जनजातीय एवं सांस्कृतिक विरासत, प्रचुर खनिज संपदा, घने वनों, सुंदर झरनों और पहाड़ियों के लिए जाना जाता है। यह 'धरती आबा' भगवान बिरसा मुंडा और अनेक अमर स्वतंत्रता सेनानियों की भूमि है। उन्होंने विदेशी विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने प्रवास के दौरान झारखण्ड की इस अनोखी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विविधता को गहराई से समझें और अनुभव करें।

​संवाद के अंत में राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे अध्ययन और अनुसंधान के साथ-साथ भारत के इतिहास, लोकतांत्रिक मूल्यों और विविध परंपराओं को आत्मसात करें। उन्होंने कहा कि ये विद्यार्थी केवल अध्ययन करने आए छात्र नहीं हैं, बल्कि भारत और उनके अपने देशों के बीच मैत्री एवं आपसी समझ के सांस्कृतिक राजदूत हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सभी छात्र भारत की मधुर स्मृतियों को संजोकर अपने देश लौटेंगे और अपने अनुभवों को साझा करेंगे।