रांची। स्वास्थ्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में बुधवार को रिम्स, के विभिन्न कार्यों एवं विकास योजनाओं की समीक्षा की गई। इसमें रिम्स में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के साथ-साथ अस्पताल की व्यवस्थाओं को बेहतर एवं व्यवस्थित करने पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान रिम्स में यूजी सीटों की संख्या वर्तमान 180 से बढ़ाकर 250 किए जाने की जानकारी दी गई। इसके लिए तैयार किए जा रहे डीपीआर पर चर्चा की गई। पीजी सीटों को 176 से बढ़ा कर 275 तथा पोस्ट-पीजी सीटों को 11 से बढ़ा कर 100 करने के लिए भी आवश्यक कार्यवाही एवं डीपीआर तैयार करने पर चर्चा हुई।
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि सीटों में वृद्धि के अनुरूप रिम्स के पुराने आईपीडी, ओपीडी एवं एकेडमिक ब्लॉक के रेनोवेशन और विस्तार कार्य को भी टिकाऊ तरीके से आगे बढ़ाना आवश्यक है। इन अतिरिक्त विकास कार्यों का प्रस्ताव सेंट्रल स्पॉन्सर्ड स्कीम के तहत भेजा जाएगा। प्रस्तावित कार्यों की अनुमानित लागत लगभग 380 करोड़ रुपये होगी। समीक्षा के दौरान रिम्स के नॉर्थ एवं साउथ कैंपस में स्थित सभी हॉस्टल एवं क्वार्टर के रेनोवेशन पर भी चर्चा हुई जिसे उक्त राशि के अंतर्गत ही बनाया जाएगा।
पीजी एवं पोस्ट-पीजी हॉस्टल के साथ-साथ स्टेडियम कॉम्प्लेक्स के विकास का कार्य पीपीपी मोड में कराने का प्रस्ताव है। इन कार्यों पर लगभग 450 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है।
बैठक में रिम्स में मरीजों के एडमिशन और डिस्चार्ज की व्यवस्था को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। अपर मुख्य सचिव ने मरीजों के एडमिशन एवं डिस्चार्ज के लिए स्पष्ट एसओपी तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि कई बार ऐसे मरीज लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहते हैं, जिन्हें लगातार इन-पेशेंट देखभाल की अधिक आवश्यकता नहीं होती। इससे गंभीर एवं जरूरतमंद नए मरीजों के लिए बेड उपलब्ध कराने में कठिनाई होती है। उन्होंने निर्देश दिया कि डिस्चार्ज के लिए स्पष्ट चिकित्सकीय मानदंड निर्धारित किए जाएं, ताकि उपचार पूरा होने अथवा अस्पताल में भर्ती रखने की आवश्यकता समाप्त होने पर मरीजों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार समय पर घर भेजा जा सके और गंभीर मरीजों के लिए बेड उपलब्ध हो।
उन्होंने यह भी कहा कि यथासंभव मरीजों को उचित रेफरल व्यवस्था के माध्यम से रिम्स भेजा जाए। बिना रेफरल के मरीजों को भर्ती करने की व्यवस्था को नियंत्रित किया जाए तथा केवल आवश्यक परिस्थितियों में ही ऐसे मरीजों को भर्ती किया जाए, ताकि रिम्स में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित हो सके।
अपर मुख्य सचिव ने वर्ष 2014 में लागू रिम्स की नियमावली को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप रिस्ट्रक्चर करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही चिकित्सकों सहित रिम्स के सभी स्वीकृत एवं कार्यरत पदों की संरचना की समीक्षा कर उन्हें वर्तमान जरूरतों के अनुरूप पुनर्गठित करने को कहा गया।
बैठक में अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, रिम्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. डी.के. सिन्हा, सहायक निदेशक बाघमारे प्रसाद कृष्ण सहित रिम्स एवं स्वास्थ्य विभाग के कई पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
