रांची। सुखदेवनगर थाना क्षेत्र के मधुकम स्थित शिव-दुर्गा मंदिर रोड में बीते 50-60 वर्षों से रह रहे गैर-आदिवासी परिवारों के 12 मकानों को तोड़े जाने के मामले में जमीन मालिक महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वोच्च अदालत ने मामले में दायर स्पेशल लीव पीटिशन (एसएलपी) को खारिज कर दिया है।

सुनवाई के दौरान अदालत ने जमीन की बिक्री करने और फिर बाद में उसे खाली कराने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात प्रमुखता से सामने आई कि संबंधित परिवारों से जमीन के बदले बड़ी रकम ली गई और बाद में उन्हें ही हटाने के लिए न्यायिक प्रक्रिया का सहारा लिया गया। अदालत ने इस पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से लेते हुए टिप्पणी की कि यह मामला जालसाजी की श्रेणी में आ सकता है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाने का भी संकेत दिया। सर्वोच्च अदालत के इस सख्त रुख को देखते हुए महादेव उरांव के अधिवक्ता ने याचिका वापस लेने का आग्रह किया, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने एसएलपी खारिज कर दी। उच्च न्यायालय के बाद अब सुप्रीम कोर्ट से भी याचिका खारिज होने के बाद जमीन मालिक को इस मामले में कोई राहत नहीं मिली है।