रांची। कैग रिपोर्ट (नियंत्रक और महालेखा परीक्षक) के मुताबिक, पीएम आवास योजना (ग्रामीण) को धरातल पर उतारने में ग्राम सभाओं ने सुस्ती बरती है। सरकार ने भी इसमें गंभीरता नहीं दिखाई है। राज्य के 24 जिलों में से 6 जिलों का चयन (2019-2024 की अवधि) लेखा परीक्षा में नमूना जांच के लिए किया गया। इसमें पलामू, सिमडेगा, गिरिडीह, बोकारो, रामगढ़ और दुमका शामिल थे। आवास योजना के लिए तय योजनाओं में कमी दिखी। कैग के अनुसार, सिस्टम द्वारा तैयार एसइसीसी- प्राथमिकता सूची/ स्थायी प्रतीक्षा सूची (पीडब्ल्यूएल) को ग्राम सभाओं और जिला अपीलीय समितियों द्वारा ठीक से सत्यापित नहीं किया गया। इससे 2.90 लाख ऐसे अपात्र लाभार्थी शामिल हो गए जिन्हें बाद में योजना के कार्यान्वयन के दौरान (2017-18 से 2023-24) ग्राम सभा द्वारा हटा दिया गया। 6 जिलों में चयनित 60 ग्राम पंचायतों में कोई भी पंचायत 2016-2024 के दौरान अंतिम पीडब्ल्यूएल तैयार करने से संबंधित कोई भी अभिलेख प्रस्तुत नहीं कर पाया।
लक्ष्य निर्धारण में असमर्थताः कैग रिपोर्ट की मानें तो राज्य द्वारा नवंबर 2022 तक इस योजना के तहत 22.34 लाख योग्य परिवारों की पहचान की गयी थी। हालांकि, एसइसीसी प्राथमिकता सूची, पीडब्ल्यूएल में अशुद्धियां, राज्य द्वारा लक्ष्यों का उपयोग करने में असमर्थता और अन्य कारणों से दो साल का विलंब हुआ। ऐसे में भारत सरकार द्वारा केवल 16.02 लाख आवासों का ही आवंटन किया गया। नतीजा यह भी हुआ कि 6.32 लाख योग्य परिवार (28%) इस योजना में शामिल नहीं हो सके।
जमीन की स्थिति का सत्यापन नहींः लाभार्थियों के चयन, आवासों की स्वीकृति के समय ग्राम पंचायत, प्रखंड, जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा जमीन की स्थिति का सत्यापन नहीं किया गया था। आवासों की स्वीकृति के लिए जमीन देने की बजाय प्राथमिकता सूची, स्थायी प्रतीक्षा सूची से भूमिहीन लाभार्थियों को रिमांड करना या हटाना और दिव्यांग व्यक्तियों की श्रेणी से संबंधित लाभार्थियों के अलग आंकड़े नहीं रखने की भी शिकायत ऑडिट के दौरान पायी गयी।
लाभार्थियों की पहचान,चयन के लिए ऑडिट
कैग के अनुसार, केंद्र सरकार ने पीएम आवास योजना-जी का आरंभ नवंबर 2016 में किया था। बेघर लोगों को घर देने और पूर्ववर्ती इंदिरा आवास योजना की कमियों को दूर करने के लिए इसे शुरू किया गया था। योजना के क्रियान्वयन (2019-24) पर ऑडिट का उद्देश्य लाभार्थियों की पहचान, चयन और पारदर्शी सत्यापन के तरीके को देखना था। इसके वित्तीय प्रबंधन, योजना की निगरानी और मूल्यांकन का पर्याप्त तरीका और अन्य पहलुओं को भी देखना था।
