पुरुलिया/बोकारो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना 'उड़े देश का आम नागरिक' (UDAN) के तहत बने बोकारो एयरपोर्ट से हवाई सेवा शुरू होने का इंतजार अब भी बरकरार है। इसी बीच बोकारो से महज 26 किलोमीटर दूर पश्चिम बंगाल सीमा पर स्थित पुरुलिया के छर्रा में एक नए क्षेत्रीय एयरपोर्ट निर्माण की कवायद तेज हो गई है। छर्रा समेत राज्य के चार स्थानों पर नए क्षेत्रीय हवाई अड्डों के विकास और उड़ानों के संचालन के लिए पश्चिम बंगाल सरकार, भारत सरकार और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एएआई) के बीच एमओयू की तिथि तय की गई है।

पश्चिम बंगाल के पुरुलिया स्थित छर्रा एयरफील्ड 1942 में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय थल व वायु सेना की गतिविधियों का एक प्रमुख केंद्र था। वहां आज भी एयरफील्ड के अवशेष मौजूद हैं। चूंकि यहां जमीन अधिग्रहण की कोई बड़ी समस्या नहीं है, इसलिए बंगाल सरकार ने इस ऐतिहासिक स्थल को नए एयरपोर्ट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। तकनीकी और एयर ट्रैफिक कंट्रोल के नियमों के अनुसार मात्र 26 किलोमीटर के दायरे में दो एयरपोर्ट का संचालन एक बड़ी चुनौती माना जाता है। ऐसे में छर्रा में नया एयरपोर्ट बनने से बोकारो में हवाई सेवा शुरू होने की संभावनाओं और धनबाद-बोकारो क्षेत्र के लोगों के सपनों पर सवालिया निशान लग गया है।

बोकारो स्टील प्लांट के हवाई अड्डे को विकसित करने के लिए 2018 में शिलान्यास हुआ था और लगभग 80 करोड़ रुपये खर्च कर 2022 तक इसे पूरी तरह तैयार किया गया। देवघर एयरपोर्ट के उद्घाटन के समय प्रधानमंत्री ने बोकारो से जल्द हवाई सेवा शुरू होने का आश्वासन दिया था।

इसके बावजूद बोकारो स्टील प्लांट, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया और झारखंड सरकार के बीच बेहतर तालमेल की कमी के कारण उड़ानें शुरू नहीं हो सकीं। रख-रखाव के अभाव में 80 करोड़ रुपये की लागत से बना टर्मिनल भवन अब धीरे-धीरे जर्जर होने लगा है। एक तरफ धनबाद के सांसद क्षेत्र में नए एयरपोर्ट की मांग कर रहे हैं और बोकारो का ढांचा बनकर तैयार है, वहीं दूसरी तरफ पड़ोसी राज्य बंगाल द्वारा महज 26 किमी दूर नए एयरपोर्ट की दिशा में कदम बढ़ाए जाने से स्थानीय निवासियों में निराशा का माहौल है।