रांची। झारखंड राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ (झासा) की रविवार को आईएमए भवन में आयोजित जनरल बॉडी मीटिंग में बड़ा फैसला लिया गया है। दुमका और पलामू समेत राज्य के विभिन्न जिलों से आए सैकड़ों डॉक्टरों की मौजूदगी में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि सरकार उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं करती है, तो 5 अक्टूबर से चरणबद्ध आंदोलन शुरू किया जाएगा। मांगें पूरी न होने पर 22 अक्टूबर से आपातकालीन (इमरजेंसी) सेवाओं को छोड़कर पूरी तरह से हड़ताल करने की चेतावनी भी दी गई है।
बैठक के निर्णयों की जानकारी देते हुए झासा के सचिव डॉ. मृत्युंजय ने बताया कि आंदोलन की शुरुआत से पहले स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव को एक ज्ञापन सौंपकर सभी मांगों से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद भी अगर सकारात्मक फैसला नहीं होता है, तो 5 अक्टूबर से आंदोलन की रूपरेखा लागू कर दी जाएगी।
झासा की सबसे प्रमुख मांग केंद्र और बिहार की तर्ज पर डायनेमिक एसीपी (Assured Career Progression) देने की है। वर्ष 2015 में विशेषज्ञ चिकित्सक संवर्ग का गठन तो कर दिया गया था, लेकिन डॉक्टरों के लिए अब तक इसकी स्पष्ट नियमावली नहीं बनाई गई है।
झासा के अध्यक्ष डॉ. विमलेश सिंह ने बताया कि जेपीएससी के तहत डॉक्टरों के 1,422 पद फिलहाल खाली पड़े हैं। संघ की मांग है कि इन पदों को भरने के लिए नियमित परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए।
राज्य सरकार द्वारा अगस्त में सरकारी डॉक्टरों की सेवानिवृत्ति की उम्र 67 वर्ष से घटाकर 65 वर्ष करने और 'संविदा नियुक्ति नियमावली-2026' को मंजूरी देने के फैसलों का संघ ने कड़ा विरोध जताया है।बैठक के दौरान डॉ. अजीत कुमार समेत राज्यभर से आए कई वरिष्ठ चिकित्सक और पदाधिकारी उपस्थित रहे।
