गुमला/रांची। झारखंड हाईकोर्ट में गुमला जिले से वर्ष 2018 से लापता एक नाबालिग बच्ची की सुरक्षित बरामदगी को लेकर दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका पर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत में एक विस्तृत हलफनामा दायर कर अब तक की जांच प्रगति, वैज्ञानिक परीक्षणों और प्रशासनिक कार्रवाई का ब्योरा पेश किया गया। मामले में प्रार्थी का पक्ष अधिवक्ता शशांक शेखर ने रखा।
राज्य सरकार के अधिवक्ता ने अदालत को सूचित किया कि मामले की मुख्य आरोपी भूखली लकड़ा का गुजरात के गांधीनगर स्थित फॉरेंसिक लैब में 'सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट' कराया गया था। इस वैज्ञानिक परीक्षण की रिपोर्ट में आरोपी महिला संदिग्ध पाई गई है, जिससे लापता बच्ची का सुराग मिलने की उम्मीद मजबूत हुई है।
अदालत को यह भी बताया गया कि वर्ष 2018 से 2022 के दौरान गुमला जिले में पदस्थापित रहे पांच तत्कालीन पुलिस अधीक्षकों (SPs) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी भूखली लकड़ा के खिलाफ कड़े दिशा-निर्देश और कार्रवाई के आदेश जारी किए थे। पुलिस अब फॉरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई में जुट गई है।
