​खूंटी। विश्व आदिवासी दिवस पर जहाँ एक ओर दुनिया आदिवासी समाज के योगदान, संस्कृति और अधिकारों को याद कर रही है, वहीं झारखंड के खूंटी जिले से महिला सशक्तिकरण की एक ऐतिहासिक मिसाल सामने आई है। मुरहू प्रखंड की हजारों आदिवासी महिला किसानों ने एकजुट होकर अपनी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल दी है। 'मुरहू नारी शक्ति किसान प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड' (MNSKPCL) से जुड़ी ये महिलाएं अब केवल खेतों में श्रम करने वाली किसान नहीं, बल्कि कंपनी की मालिक, शेयरधारक, निदेशक और मुख्य कारोबारी निर्णयकर्ता हैं।

​3,766 महिलाएं बनीं मालिक, 8 हजार से अधिक ले रहे लाभ

​वर्ष 2017 में नव भारत जागृति केंद्र और टाटा ट्रस्ट्स की सहयोगी संस्था 'सिनी' की पहल से शुरू हुई इस यात्रा को बाद में 'जेएसएलपीएस' के सहयोग से 'जोहार परियोजना' के तहत विस्तार मिला। 5 मार्च 2018 को पंजीकृत हुई इस कंपनी में आज 3,766 से अधिक आदिवासी महिलाएं शेयरधारक के रूप में जुड़ी हैं, जबकि 8,113 से अधिक किसान इसकी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। खास बात यह है कि कंपनी का पूरा निदेशक मंडल गांव की आदिवासी महिलाओं द्वारा ही संचालित होता है, जो खरीद, प्रसंस्करण से लेकर बाजार और वित्तीय प्रबंधन के सभी फैसले खुद लेती हैं।

​48 लाख से 6.11 करोड़ रुपये तक का आर्थिक सफर

​सामूहिक प्रयास और कुशल प्रबंधन के बल पर कंपनी का सालाना कारोबार लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है:

वित्तीय वर्ष कारोबार (रुपये में)

2018-19 48 लाख

2019-20 2.12 करोड़

2020-21 2.63 करोड़

2021-22 3.37 करोड़

2022-23 3.13 करोड़

2023-24 3.81 करोड़

2024-25 5.84 करोड़

2025-26 6.11 करोड़

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कंपनी ने 6.78 करोड़ रुपये के कारोबार का लक्ष्य निर्धारित किया है।

​पारंपरिक ज्ञान बना आधुनिक व्यापार का जरिया

​महिलाएं अपने पारंपरिक ज्ञान का उपयोग आधुनिक बाजार की मांग के अनुरूप कर रही हैं। स्थानीय मड़ुआ को प्रसंस्करण के बाद 'कोडे मड़ुआ' आटा के रूप में बेचा जा रहा है, जिससे बिचौलियों के बजाय सीधे किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं। इसके अलावा लाह से चूड़ियां व हस्तशिल्प उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। इमली, आम, कटहल, धान, सब्जी के साथ-साथ बकरी, सुअर, मुर्गी और मछली पालन के जरिए मूल्य संवर्धन कर ग्रामीण परिवारों की आय में भारी बढ़ोतरी की गई है।

​हजारों परिवारों का जीवन स्तर बदला

​इस पहल से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव आया है।​4,620 परिवारों ने 1.20 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय हासिल की है।​6,690 परिवार दो या दो से अधिक आजीविका गतिविधियों से जुड़े हैं।​66 ग्रामीण सूक्ष्म उद्यमी तैयार किए गए हैं।

​कंपनी की मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिव्या स्वरूप के अनुसार इस यात्रा की सबसे बड़ी उपलब्धि महिलाओं में आया आत्मविश्वास है। महिलाएं अब किसी योजना की केवल लाभार्थी नहीं हैं, बल्कि शेयरधारक और निर्णयकर्ता हैं। लक्ष्य सिर्फ कारोबार बढ़ाना नहीं, बल्कि सम्मानजनक रोजगार और स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाना है।

​आत्मनिर्भरता से सशक्त समाज का संदेश

खूंटी की इन महिलाओं की सफलता यह साबित करती है कि आदिवासी समाज की महिलाएं केवल परंपरा की संरक्षक ही नहीं, बल्कि आधुनिक विकास की सशक्त अगुआ भी हैं। मुरहू की महिलाओं का यह सामूहिक प्रयास दर्शाता है कि जब महिलाएं नेतृत्व संभालती हैं, तो न केवल एक कंपनी आगे बढ़ती है, बल्कि पूरे समाज का कायाकल्प हो जाता है।