​रांची। भारतीय जनता पार्टी ने दावा किया है कि आगामी परिसीमन के बाद झारखंड में विधानसभा की सीटें 81 से बढ़कर लगभग 121 और लोकसभा की सीटें 14 से बढ़कर 21 हो जाएंगी। इसके साथ ही पार्टी ने कांग्रेस पर परिसीमन के मुद्दे पर राज्य की जनता के बीच भ्रम और झूठ फैलाने का आरोप लगाया है।

​मंगलवार को रांची में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने कहा कि कांग्रेस अपने अतीत के फैसलों के कारण अपराध बोध से ग्रसित है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2008 में बने नियमों के तहत 2026 तक परिसीमन पर रोक थी, जिसकी समयावधि अब समाप्त हो रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सीटों में लगभग 50% वृद्धि का प्रस्ताव रखा है।

​भाजपा महामंत्री के अनुसार नए परिसीमन के बाद कुल सीटें 81 से बढ़कर करीब 121 होंगी। इनमें अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए 14 और अनुसूचित जाति (एससी) के लिए 14 अतिरिक्त सीटें बढ़ेंगी।​लोकसभा की कुल सीटें 14 से बढ़कर 21 होंगी। इसमें एसटी आरक्षित सीटें 5 से बढ़कर 10 और एससी आरक्षित सीट 1 से बढ़कर 2 हो जाएंगी।

​अमर बाउरी ने कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी से सवाल किया कि आखिर झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस 50% सीटें बढ़ाने के भाजपा के इस प्रस्ताव का विरोध क्यों कर रहे हैं? उन्होंने कहा कि 2008 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 84वें संविधान संशोधन के जरिए जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया था, जिसमें भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए भी सहयोग किया था। लेकिन आज जब भाजपा सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव ला रही है, तो कांग्रेस इसका विरोध कर रही है। कांग्रेस को 2008 में आदिवासी सीटों को प्रभावित करने वाली अपनी पुरानी चूकों के लिए राज्य की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

​भाजपा नेता ने पार्टी को आदिवासियों का सच्चा हितैषी बताते हुए कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने वर्ष 2000 में भगवान बिरसा मुंडा की जयंती (15 नवंबर) पर झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिया था। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दिन को देशभर में 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाने की शुरुआत की और देश के सर्वोच्च पद पर द्रौपदी मुर्मू को आसीन कर जनजातीय समाज का गौरव बढ़ाया।

कांग्रेस का भाजपा पर सीधा हमला: "बताएं झारखंड में घटेंगी या नहीं एसटी की आरक्षित सीटें?"

प्रदेश कांग्रेस महासचिव आलोक कुमार दूबे ने भाजपा पर आदिवासी अधिकारों और आरक्षण को लेकर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने भाजपा को सीधे चुनौती देते हुए एक लाइन में जवाब देने की मांग की है कि भविष्य में परिसीमन के बाद झारखंड में अनुसूचित जनजाति (एसटी) की आरक्षित सीटें घटेंगी या नहीं।

​दूबे ने कहा कि आजादी के बाद से आदिवासियों के राजनीतिक, सामाजिक और जल-जंगल-जमीन के अधिकारों को मजबूत करने में कांग्रेस की निर्णायक भूमिका रही है। उन्होंने परिसीमन विवाद पर भाजपा के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि परिसीमन किसी दल की मनमर्जी से नहीं, बल्कि संवैधानिक प्रक्रिया से होता है।

श्री ​दूबे ने कहा कि हालिया विशाल आदिवासी रैली से बौखलाकर भाजपा नेता परिसीमन और इतिहास को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। आदिवासी समाज अब सिर्फ खोखले भाषण नहीं सुनेगा, बल्कि अपने अधिकारों और प्रतिनिधित्व पर भाजपा से स्पष्ट नीति और जवाब मांगेगा।