​रांची: झारखंड में सरना धर्म कोड को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक सरगर्मी तेज हो गई है। आदिवासी छात्र संघ ने साफ कर दिया है कि यदि केंद्र सरकार सरना धर्म कोड लागू किए बिना राज्य में जनगणना और परिसीमन कराने की कोशिश करती है, तो इसका जोरदार विरोध और बहिष्कार किया जाएगा।

​शनिवार को रांची में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संघ के अध्यक्ष डॉ. सुशील मिंज ने कहा कि सरना धर्म कोड के बिना झारखंड में जनगणना और परिसीमन संभव नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बिना पूरा मामला अधर में लटक जाएगा और केंद्र सरकार के पास इसे लागू करने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं है।

केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए आदिवासी छात्र संघ ने व्यापक आंदोलन की रूपरेखा तैयार की है।​13-14 सितंबर को रांची के मोराबादी मैदान में 'ऑल इंडिया ट्राइबल कल्चर' कार्यक्रम का आयोजन होगा, जिसमें देशभर के राज्यों से आदिवासी प्रतिनिधि शामिल होंगे।​18 सितंबर को गुमला में विशाल महारैली के साथ विरोध प्रदर्शन की शुरुआत होगी और 4 अक्टूबर को रांची में राज्यस्तरीय महारैली आयोजित की जाएगी।

जरूरत पड़ने पर संघ ने आर्थिक नाकेबंदी और 'भारत बंद' जैसे कड़े कदम उठाने का भी विचार बनाया है। संसद में पारित होने वाले परिसीमन विधेयक का भी कड़ा विरोध किया जाएगा।

डॉ. सुशील मिंज ने कांग्रेस और भाजपा दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों पर आदिवासियों के प्रति उदासीन रवैया अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ​1961 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने एक साजिश के तहत जनगणना फॉर्म से 'आदिवासी धर्म कोड' को हटाकर 'अन्य' का कॉलम जोड़ा था।​अब वर्तमान भाजपा सरकार उस 'अन्य' कॉलम को भी हटाने की तैयारी में है, जिससे आदिवासियों की पहचान और अस्तित्व मिटाने का खतरा पैदा हो गया है।

संघ का कहना है कि धर्म कोड का अभाव और परिसीमन आपस में सीधे जुड़े हुए हैं। पृथक धर्म कोड न होने के कारण आदिवासी आबादी को जबरन हिंदू धर्म कोड में गिना जा रहा है, जिससे कागजों पर आदिवासियों की वास्तविक संख्या घटकर दिखाई दे रही है। संघ का आरोप है कि यह आदिवासियों को मिलने वाले संवैधानिक आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म करने की एक गहरी साजिश है।

​संघ के अध्यक्ष ने मांग की कि जिस तरह देश में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन धर्म के लिए अलग कोड मौजूद हैं, उसी तरह प्रकृति पूजक आदिवासियों के लिए भी 'सरना धर्म कोड' अनिवार्य रूप से लागू किया जाना चाहिए।