रांची। झारखंड में जल संरक्षण और सुखाड़ जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने के लिए एक नई और महत्वाकांक्षी योजना बनायी गई है। केंद्र सरकार के सुझाव पर राज्य की ग्राम पंचायतों के लिए अब 'जल बजट' और 'जल सुरक्षा योजना' तैयार की जाएगी। इस मुहिम के पहले चरण के लिए देश भर से चुने गए 10 राज्यों में झारखंड को भी शामिल किया गया है। लोगों में जागरुकता बढ़ाने के लिए केंद्र द्वारा एक 'जल सुरक्षा पुस्तिका' भी जारी की गई है। फिलहाल, झारखंड पंचायती राज विभाग को इससे जुड़ी मार्गदर्शिका (गाइडलाइन) मिल चुकी है, जिसका अध्ययन किया जा रहा है।
इस योजना के शुरुआती चरण में देश के 10 राज्यों (बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल) को शॉर्टलिस्ट किया गया है। इसके तहत कुल 100 जिलों, 100 ब्लॉकों और 1,000 ग्राम पंचायतों को कवर किया जाएगा। पहले बैच में झारखंड सहित पांच राज्यों के ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा चुका है।
नई दिल्ली में मास्टर ट्रेनर हुए तैयार
जल बजट और सुरक्षा योजना को जमीनी स्तर पर सही तरीके से लागू करने के लिए केंद्र के पंचायती राज मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्तर के मास्टर ट्रेनर तैयार करने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में 13 से 16 जुलाई तक नई दिल्ली में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें झारखंड के प्रतिभागियों ने भी हिस्सा लिया। ये मास्टर ट्रेनर अब राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाएंगे। वे आगामी 'जन योजना अभियान' के दौरान ग्राम पंचायतों को तकनीकी रूप से सुदृढ़, साक्ष्य-आधारित और समुदाय-संचालित जल सुरक्षा योजनाएं बनाने में मदद करेंगे।
स्थानीय ज्ञान से बदलेगी सूरत
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज के अनुसार, ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों को पानी की समस्याओं का गहरा और प्रत्यक्ष अनुभव होता है। इस पहल का उद्देश्य इसी स्थानीय ज्ञान को 'जल बजट' के माध्यम से एक व्यवस्थित कार्ययोजना में बदलना है। यह पहल सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार परिवर्तन के जरिए भविष्य के लिए तैयार, सतत एवं सहभागी जल प्रबंधन को मजबूत करेगी, जिससे जल संकटग्रस्त क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी।
