देवघर । प्रयागराज में आयोजित अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में प्रस्तावित बैद्यनाथ कॉरिडोर और उससे होनेवाले संभावित विस्थापन का मुद्दा छाया रहा। महासभा ने सर्वसम्मति से कॉरिडोर निर्माण के विरोध का प्रस्ताव पारित करते हुए देश भर के तीर्थ पुरोहितों से इस मुद्दे पर एकजुट होने का आह्वान किया है।

बैठक की अध्यक्षता महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकृष्ण तिवारी ने की। इसमें देवघर (बैद्यनाथधाम) के तीर्थ पुरोहितों ने भी हिस्सा लिया। बैठक में अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनोद दत्त द्वारी और राष्ट्रीय संगठन मंत्री पन्नालाल मिश्रा ने प्रस्तावित कॉरिडोर के कारण देवघर में उत्पन्न हो रही विस्थापन की समस्या को प्रमुखता से उठाया।

दूरभाष पर जानकारी देते हुए विनोद दत्त द्वारी ने बताया कि श्रावणी मेला संपन्न होने के बाद सितंबर महीने में अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा की एक 5 सदस्यीय कमेटी देवघर का दौरा करेगी। यह टीम धरातल पर जाकर कॉरिडोर से उत्पन्न हालात का जायजा लेगी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर महासभा के अध्यक्ष की सहमति से झारखंड के मुख्यमंत्री को पत्र भेजा जाएगा, जिसमें कॉरिडोर से पैदा होने वाली समस्याओं के समाधान की मांग की जाएगी। इसके अलावा, महासभा के युवा अध्यक्ष अरविंद मुरलीधरन के नेतृत्व में एक कमेटी देवघर सहित अन्य तीर्थ स्थलों का भ्रमण कर तीर्थ पुरोहितों के हक और अधिकारों की लड़ाई लड़ेगी।

महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकृष्ण तिवारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि कॉरिडोर के नाम पर स्थानीय लोगों और पुरोहितों को बेघर या विस्थापित करना किसी भी दृष्टिकोण से जायज नहीं है।हम विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन विकास के नाम पर विनाश को कतई स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि तीर्थ पुरोहितों के हितों पर कुठाराघात होता है, तो महासभा पूरे देश में इसका पुरजोर विरोध करेगी।

बैठक के दौरान देश भर के विभिन्न तीर्थ क्षेत्रों की समस्याओं के निराकरण और संगठन को सक्रिय बनाने पर गहन विचार-विमर्श हुआ। इस दौरान सर्वसम्मति से केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा मंदिरों के सरकारी अधिग्रहण तथा कॉरिडोर निर्माण की नीतियों का कड़ा विरोध करने का निर्णय लिया गया।

इस बैठक में देवघर सहित देश भर के प्रमुख तीर्थ स्थलों से आए तीर्थ पुरोहितों और महासभा के वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहभागिता रही।