​देवघर। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने सोमवार शाम देवघर पहुंचकर स्थानीय व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राज्य स्तरीय विधिक सेवा एवं सशक्तिकरण शिविर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने न्याय प्रणाली में संवेदनशीलता और सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समय आ गया है कि हमारी न्यायपालिका (चाहे वह तालुका, जिला स्तर हो या उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालय) पीड़ितों और गरीबों के दर्द को उसी प्रकार समझे, जैसे एक अस्पताल में मरीजों का इलाज किया जाता है।

​मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्यायपालिका में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिससे आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए अदालत के दरवाजे 24 घंटे और सातों दिन खुले रहें। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जब कोई मरीज अस्पताल जाता है, तो स्वास्थ्य कर्मियों के यह कहने मात्र से कि चिंता मत करिए, आप जल्द ही स्वस्थ हो जाएंगे, मरीज की आधी समस्याएं वहीं ठीक हो जाती हैं। इसी तर्ज पर, लीगल एड के अधिवक्ताओं और पारा लीगल वालंटियर्स को पीड़ितों और गरीबों तक पहुंच कर उनकी मदद करनी चाहिए।

​समारोह के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों का वितरण भी किया। कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उन्होंने बाबा बैद्यनाथ के दरबार में हाजिरी लगाकर आशीर्वाद लिया।

इस कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह, न्यायाधीश चंद्रशेखर, झारखंड हाईकोर्ट के न्यायाधीश एवं झालसा के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन सुजीत नारायण प्रसाद, और न्यायाधीश आर मुखोपाध्याय विशेष रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कौशल किशोर झा, प्रमंडलीय आयुक्त शैलेंद्र लाल, डीआईजी अंबर लकड़ा, डीसी सौरभ कुमार भुवानिया, एसपी प्रवीण पुष्कर सहित कई न्यायिक पदाधिकारी और गणमान्य लोग मौजूद थे।