​रांची। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सह राज्यसभा सांसद आदित्य साहू ने सरकार से मांग की है कि जेपीएससी के तीनों सदस्यों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर उन पर मुकदमा दर्ज किया जाए और उन्हें जेल भेजा जाए। इसके साथ ही उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराने की मांग को दोहराया है।

​उन्होंने कहा कि अध्यक्ष के इस्तीफे के बावजूद तीनों सदस्य अभी भी अपने पदों पर बने हुए हैं। जब तक ये सदस्य पद पर रहेंगे, तब तक इस महाघोटाले की निष्पक्ष जांच की कल्पना भी नहीं की जा सकती। उन्होंने सवाल उठाया कि तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते के इस्तीफे के बाद राज्य सरकार ने उन पर क्या कार्रवाई की? सरकार ने उन पर मुकदमा दर्ज कर उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित क्यों नहीं की?

​श्री साहू ने आरोप लगाया कि जेपीएससी सहित राज्य की सभी भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर हेमंत सरकार की मंशा शुरू से ही संदिग्ध रही है। सरकार छात्रों को न्याय दिलाने के बजाय मामले की लीपापोती करने और भ्रष्टाचार में लिप्त 'बड़ी मछलियों' को बचाने का प्रपंच रच रही है।

​उन्होंने सीआईडी जांच को महज़ एक दिखावा करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत सीबीआई जांच की अनुशंसा करनी चाहिए। केवल सीबीआई ही इस पूरे मामले का दूध का दूध और पानी का पानी कर सकती है।

​श्री साहू ने कहा कि सत्ता पक्ष के नेता दिल्ली के मुद्दों पर राजनीतिक ड्रामा करते हैं, लेकिन झारखंडी छात्रों के हक की बात आते ही मौन साध लेते हैं।

​उन्होंने बताया कि जेपीएससी, जेएसएससी और उत्पाद सिपाही भर्ती घोटालों के विरोध में भाजपा के झारखंडी सांसदों ने संसद भवन के मकर द्वार पर आवाज बुलंद की है। इस लड़ाई को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को संसद परिसर में सांसदों का एक घंटे का मौन उपवास रहेगा। भाजपा छात्रों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होने देगी और सड़क से लेकर संसद तक इस लड़ाई को पूरे दम-खम से लड़ेगी।