रांची। स्वास्थ्य विभाग एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), झारखंड के तत्त्वावधान में नामकुम स्थित आईपीएच सभागार में 'जेंडर बेस्ड वायलेंस (जीबीभी) संवेदनशीलता कार्यशाला' का आयोजन किया गया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य लैंगिक आधारित हिंसा की रोकथाम, पीओएसएच अधिनियम 2013 के प्रति जागरूकता और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतों का प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ स्टेट पीओएसएच-आईसीसी की पीठासीन अधिकारी डॉ. पुष्पा के स्वागत संबोधन से हुआ। कार्यशाला को संबोधित करते हुए एनएचएम झारखंड के अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने कहा कि प्रत्येक कार्यस्थल को सुरक्षित, सम्मानजनक और लैंगिक रूप से संवेदनशील बनाना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने संस्था में उत्पीड़न के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति लागू करने पर बल दिया। निदेशक प्रमुख (स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. सिद्धार्थ सान्याल ने शिकायत दर्ज करने, जांच प्रक्रिया, गोपनीयता बनाए रखने तथा कर्मचारियों के अधिकारों पर विस्तृत जानकारी दी।
सदर अस्पताल रांची की डॉ. वंदिता ने यौन उत्पीड़न से जुड़ी भ्रांतियों को स्पष्ट किया, जबकि सुजाता कुमारी एवं डॉ. नसरीन जमाल ने आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की कार्यप्रणाली व समय-सीमा पर प्रकाश डाला। समापन सत्र में डॉ. पुष्पा एवं डॉ. कमलेश कुमार ने प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान किया।
कार्यशाला के दौरान एनएचएम झारखंड मुख्यालय में गठित आंतरिक शिकायत समिति के पुनर्गठन की घोषणा की गई। डॉ. पुष्पा को SHE-Box पोर्टल के ऑनलाइन प्रबंधन का दायित्व सौंपा गया है। पुनर्गठित समिति में डॉ. कमलेश कुमार,अनिमा किस्कु,अकय मिंज, रफत फरजाना तथा यूनिसेफ व आईसीआरडब्लू के प्रतिनिधि शामिल हैं। कार्यक्रम में डॉ. अश्विनी कुमार, डॉ. जसीना, डॉ. पंकज, डॉ. मुकेश, डॉ. राजक सहित राज्य व जिला स्तर के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
