रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने असिस्टेंट टीचर नियुक्ति से जुड़े एक अवमानना मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार और विभिन्न जिलों के उपायुक्तों के खिलाफ चल रही कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।
जस्टिस राजेश शंकर की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि अदालत के पूर्व आदेश के तहत याचिकाकर्ताओं के आवेदनों पर सरकार द्वारा नियमानुसार पुनर्विचार किया जा चुका है। समीक्षा में पाया गया कि अपनी-अपनी श्रेणी में चयनित अंतिम अभ्यर्थियों की तुलना में याचिकाकर्ताओं के प्राप्तांक कम थे। इसी आधार पर उनकी नियुक्ति का दावा खारिज किया गया है, जिसे कोर्ट के आदेश का पूर्ण अनुपालन माना जाता है।
यह मामला कंटेम्प्ट केस (सिविल) संख्या 269/2024 से जुड़ा है। प्रदुमन प्रसाद साहू, दिलीप कुमार, गोपाल साव और सुदीप कुमार गुप्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आरोप लगाया था कि 17 अक्टूबर 2023 को दिए गए आदेश (WP (S) No. 1896/2022) का अधिकारियों द्वारा जानबूझकर पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों पर अवमानना का मामला दर्ज कर कार्रवाई की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता निरुपमा ने अदालत को बताया कि सभी संबंधित जिलों के उपायुक्तों ने जवाबी हलफनामा दाखिल कर दिया है। सरकार ने हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत ही अभ्यर्थियों के दावों की पुनर्जॉंच की थी।
राज्य सरकार के जवाब से संतुष्ट होकर जस्टिस राजेश शंकर ने कहा कि जब अदालत के आदेश के अनुपालन में याचिकाकर्ताओं के मामलों पर पुनर्विचार कर निर्णय लिया जा चुका है, तो आगे अवमानना कार्यवाही चलाने का कोई औचित्य नहीं रह जाता। इसके साथ ही अदालत ने सभी विपक्षी पक्षों को राहत देते हुए अवमानना याचिका का निष्पादन कर दिया।
