रांची। जेएसएससी सीजीएल नियुक्ति रद्द किए जाने के फैसले के बाद चयनित कमर्चारियों का विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। रांची में लगातार हो रही बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में प्रभावित कर्मचारी सोमवार रात से ही प्रोजेक्ट भवन के गेट पर डटे हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के इस फैसले को ‘तुगलकी फरमान’ बताते हुए आमरण अनशन और फैसले को अदालत में चुनौती देने की चेतावनी दी है।

आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार के इस कदम से उनके सामने गंभीर आर्थिक और भविष्य का संकट खड़ा हो गया है। अभ्यर्थियों ने दावा किया कि उन्हें नियुक्ति रद्द किए जाने की कोई लिखित सूचना तक नहीं दी गई है।

गौरतलब है कि वर्ष 2015 में इस परीक्षा का विज्ञापन निकला था। लंबी कानूनी लड़ाई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद करीब 2000 युवाओं को नियुक्ति मिली थी। इनमें से लगभग 50% अभ्यर्थी पहले से कहीं और कार्यरत थे, जिन्होंने इस सेवा के लिए अपनी पुरानी नौकरियां छोड़ दी थीं। अब नई नौकरी रद्द होने से वे दोहरे संकट में फंस गए हैं।

कर्मचारियों का तर्क है कि नियुक्ति पत्र में स्पष्ट लिखा था कि सीआईडी की एसआईटी जांच में व्यक्तिगत रूप से धांधली या अनियमितता में दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थी की ही सेवा समाप्त की जाएगी। ऐसे में कुछ अभ्यर्थियों की गड़बड़ी के कारण पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करना न्यायसंगत नहीं है। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि वे हक की लड़ाई के लिए प्रोजेक्ट भवन के बाहर डटे रहेंगे और जल्द ही निष्पक्ष न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।