हजारीबाग। झारखंड की समृद्ध लोक कला सोहराई और कोहवर का जादू अब सात समंदर पार जापान तक पहुँच गया है। जापान से आए पांच पर्यटकों के दल ने हजारीबाग स्थित 'सोहराई कला महिला विकास समिति' की लघु उत्पादन इकाई का विशेष भ्रमण किया। पारंपरिक सोहराई गीतों के साथ जापानी अतिथियों का भव्य स्वागत किया गया, जिससे गदगद होकर पर्यटकों ने न केवल कलाकृतियों की खरीदारी की, बल्कि खुद ब्रश थामकर सोहराई पेंटिंग के बारीक गुर भी सीखे।
जापानी पर्यटकों ने स्थानीय महिला आर्टिजनों द्वारा प्राकृतिक रंगों से तैयार सोहराई और कोहवर पेंटिंग्स को बेहद ध्यान से देखा और उनकी जमकर सराहना करते हुए कई पेंटिंग्स खरीदीं।
भ्रमण के दौरान अतिथियों ने स्वयं सोहराई पेंटिंग बनाकर इसकी पारंपरिक तकनीकों, सांस्कृतिक महत्व और इतिहास को समझा।
हजारीबाग की कला से प्रभावित पर्यटकों ने इस कला को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने के लिए जापान में सोहराई कला की विशेष प्रदर्शनी आयोजित करने और स्थानीय कलाकारों को जापान आमंत्रित करने का आश्वासन दिया।
यह दल सोहराई कला महिला विकास समिति की सचिव अल्का इमाम एवं ऐदम इमाम के विशेष निमंत्रण पर हजारीबाग की संस्कृति और लोक कला को करीब से जानने भारत आया था।
मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड द्वारा संचालित इस इकाई और टूलकिट सुविधाओं के जरिए स्थानीय महिला कलाकारों को अपनी कला को बाजार तक पहुँचाने का बेहतरीन मंच मिला है। जापानी दल की इस पहल से झारखंड की यह प्राचीन सांस्कृतिक विरासत अब वैश्विक पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।
