​रांची। झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य में धड़ल्ले से चल रहे अवैध बालू के कारोबार को लेकर हेमंत सोरेन सरकार पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) की सख्त रोक के बावजूद आखिर किसके संरक्षण में यह अवैध कारोबार बेखौफ जारी है?

​सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर साझा एक पोस्ट में श्री मरांडी ने लिखा कि मॉनसून के दौरान एनजीटी द्वारा नदियों से बालू के उठाव पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। इसके बावजूद राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न जिलों की सड़कों पर बिना नंबर प्लेट और बिना वैध चालान के बालू लदे ट्रक धड़ल्ले से दौड़ रहे हैं। उन्होंने इसे न केवल पर्यावरणीय नियमों का उल्लंघन बताया, बल्कि राज्य की कानून-व्यवस्था और राजस्व प्रणाली पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा किया।

​बाबूलाल मरांडी ने पर्यावरण विशेषज्ञों की चेतावनियों का हवाला देते हुए कहा कि अनियंत्रित और अवैध बालू खनन से

​नदियों की प्राकृतिक धारा प्रभावित हो रही है।​भूजल स्तर में तेजी से गिरावट आ रही है।​नदी तटों के कटाव से पर्यावरणीय संतुलन को दीर्घकालिक क्षति पहुंच रही है।

​सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने पूछा कि जब ट्रैफिक कैमरों के जरिए आम नागरिकों की बाइक और कारों का तुरंत चालान काट दिया जाता है, तो बिना नंबर प्लेट सड़कों पर दौड़ रहे बालू तस्करों के ट्रकों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती? उन्होंने पूछा कि क्या कानून के नियम सिर्फ साधारण जनता के लिए ही बनाए गए हैं?

​श्री मरांडी ने मुख्यमंत्री से इस मामले पर तुरंत संज्ञान लेने और अवैध बालू खनन व परिवहन पर कड़ाई से रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि समय रहते सख्त कदम उठाने से न केवल झारखंड की नदियों और पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि सरकारी राजस्व को हो रही भारी चपत पर भी लगाम लगेगी।