बोकारो। बोकारो के जैनामोड़ में शनिवार को आदिवासी बचाव मोर्चा की बैठक मोर्चा के अध्यक्ष अमित सोरेन की अध्यक्षता में किया गया। जहां आदिवासियों का आस्था का केंद्र मरांग बुरु पारसनाथ की धरती मधुबन में 4 एवं 5 नवंबर को आयोजित मारांग बुरु धोरोमगढ़ महासम्मेलन की तैयारी अधिक से अधिक लोगों कैसे पहुंचे इसको लेकर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान अमित सोरेन ने कहा कि जिला प्रशासन के द्वारा कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों एवं पड़ोसी देशों से हजारों लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैयारी चल रही है। महासम्मेलन में झारखंड के अलावा असम, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, बिहार,अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा सहित विभिन्न राज्यों से समाज के प्रतिनिधि शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इस महासम्मेलन में संथाल समाज की पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था, रीति-रिवाज, पूजा पद्धति, हासा भाषा, धोरोम, संस्कृति तथा जल, जंगल और जमीन से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चिंतन मंथन किया जाएगा। वहीं अजय किस्कू ने कहा कि पारसनाथ पहाड़ आदिवासी समुदाय के लिए धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है। मरांग बुरु को आदिवासी समाज के एक महत्वपूर्ण आस्था केंद्र के रूप है। जिसे सिक्स और विकसित किया जाएगा।
मौके पर सहदेव मांझी, सोहराय हांसदा, कमलेश्वर मांझी, सुखदेव मुर्मू,सोहन मुर्मू, विनय मुर्मू,लालबाबू सोरेन, रमेश हेंब्रम, कमलेश्वर सोरेन, राजेश मुर्मू, संजय मुर्मू, राजेंद्र मरांडी, विश्वनाथ मुर्मू, रामधन किस्कू, कृष्ण किशोर मुर्मू, अजीत मुर्मू, लखन मांझी, नरेश किस्कू, लक्ष्मण हेंब्रम, बिंदेश्वर मुर्मू, सूरज देव हांसदा, धनी लाल मांझी, बिहारी सोरेन, तुलसी मरांडी, बिंदेश्वर मुर्मू, दिगम सोरेन आदि शामिल थे।
