चाईबासा। चाईबासा में "दिशोम गुरु" शिबू सोरेन की प्रतिमा स्थापना का स्थानीय ग्रामसभा सदस्यों और रैयतों ने पूर्ण समर्थन किया है। खप्परसाई, दुम्बीसाई, सिकुरसाई समेत संबंधित मौजा के लोगों को इस पर कोई आपत्ति नहीं है। यह जानकारी झामुमो जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम ने "दिशोम गुरु" शिबू सोरेन चौक पर आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान दी।
सोनाराम देवगम ने कहा कि स्थानीय लोग प्रतिमा स्थापना के निर्णय का स्वागत कर रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थित कुछ लोग और बाहरी तत्व किसी के इशारे पर माहौल खराब करने और अनावश्यक विवाद खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं।
झामुमो जिलाध्यक्ष ने विरोधियों की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि
जब चाईबासा के पुराने डीसी कार्यालय के समक्ष तत्कालीन केंद्रीय गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा स्थापित की गई थी, तब ग्रामसभा की दुहाई देने वाले ये तथाकथित सामाजिक संगठन मौन क्यों थे? खरसावां गोलीकांड में हजारों आदिवासी-मूलवासी शहीद हुए थे, लेकिन उस समय इन संगठनों ने विरोध करने के बजाय तत्कालीन सत्ता को मौन समर्थन दिया था।
श्री देवगम ने कहा कि एक महापुरुष का सम्मान करने के नाम पर दूसरे का अपमान करना पूरी तरह गलत है। कोल्हान, संथाल परगना, पलामू या जमशेदपुर—पूरे झारखंड के शहीद और ऐतिहासिक व्यक्तित्व राज्य का गौरव हैं और सभी को समान सम्मान मिलना चाहिए। इन्हें क्षेत्र,जाति या धर्म में बांटना झारखंड की एकता के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ तत्व कोल्हान और संथाल परगना के बीच विभाजन पैदा कर समाज को लड़ाने की साजिश रच रहे हैं।
सोनाराम देवगम ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि जिस स्थान पर दिशोम गुरु की प्रतिमा स्थापित की जा रही है, उस पर पहले किसी व्यक्ति या संगठन का कोई दावा नहीं था।यदि पहले से कोई दावा होता, तो झामुमो विवाद के बजाय कोई अन्य उपयुक्त स्थान चुनता।
जब निर्माण कार्य लगभग पूरा होने को है, तब विरोध शुरू करना यह दर्शाता है कि इनका उद्देश्य शहीदों का सम्मान नहीं, बल्कि केवल विवाद खड़ा करना है।
चाईबासा में तांबो चौक और गितिलपी चौक जैसे कई स्थान हैं, जहाँ बिना किसी विवाद के कोल्हान के वीर सपूतों की प्रतिमाएं स्थापित की जा सकती हैं।
