​रांची। झारखंड विधानसभा के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन नियुक्ति परीक्षाओं में कथित धांधली को लेकर विपक्ष के जोरदार हंगामे और शोर-शराबे के बीच वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए 8,399.31 करोड़ रुपये का पहला अनुपूरक बजट सदन के पटल पर रखा। लगातार हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष रबीन्द्रनाथ महतो ने सदन की कार्यवाही 10 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

​नियुक्ति परीक्षाओं में गड़बड़ी पर वेल में पहुंचे भाजपा विधायक

​सदन की कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं में धांधली का मुद्दा उठाया। उन्होंने वर्तमान परीक्षाओं को तुरंत रद्द कर हाईकोर्ट की निगरानी में पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की।

​बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य के छात्र पिछले 13 दिनों से सत्याग्रह पर हैं और भूख हड़ताल कर रहे हैं। अगर सरकार के पास कुछ छुपाने को नहीं है, तो वह सीबीआई जांच से क्यों भाग रही है?

​संसदीय कार्य मंत्री द्वारा चर्चा का आश्वासन देने के बावजूद, जैसे ही विधायक प्रदीप यादव बोलने खड़े हुए, भाजपा विधायक नारेबाजी करते हुए वेल में आ गए। हंगामे के कारण अध्यक्ष ने पहले कार्यवाही को दोपहर 12:30 बजे तक के लिए स्थगित किया।

​मात्र 20 मिनट चली कार्यवाही, हंगामे में पेश हुआ बजट

​दोपहर 12:30 बजे दोबारा कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने फिर से हंगामा शुरू कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने विपक्ष के रवैये की आलोचना करते हुए कहा कि अनुपूरक बजट राज्य के वित्तीय प्रबंधन और विकास के लिए बेहद जरूरी है तथा परीक्षाओं के मुद्दे पर सदन में पूरी चर्चा कराई जाएगी। इसके बाद उन्होंने अनुपूरक बजट पेश किया, जिसके तुरंत बाद सदन की कार्यवाही सोमवार (10 अगस्त) तक के लिए स्थगित कर दी गई।

​सदन से सड़क तक पक्ष-विपक्ष में तीखी नोंक-झोंक

​जेपीएससी मुद्दे पर विधानसभा के अंदर और बाहर दोनों जगह सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और एनडीए विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है और उनकी मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन है।

मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार से वार्ता करने वाले वास्तविक छात्र नहीं, बल्कि कोचिंग संचालक और नेता प्रतिपक्ष के करीबी लोग थे। उन्होंने कहा कि भाजपा रांची में दिल्ली के जंतर-मंतर जैसा माहौल बनाना चाहती है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

​मंत्री चमरा लिंडा, शिल्पी नेहा तिर्की और कांग्रेस विधायक राजेश कच्छप ने भी भाजपा पर छात्रों के आंदोलन का राजनीतिक फायदा उठाने का आरोप लगाया।