रांची। ​झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी परीक्षाओं की गड़बड़ियों को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब पूरी तरह सियासी अखाड़ा बन चुका है। भारतीय जनता पार्टी के 48 घंटे के अल्टीमेटम के जवाब में गुरुवार को सत्ताधारी 'इंडिया' गठबंधन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल प्रोजेक्ट भवन पहुंचा और मुख्य सचिव से मुलाकात की। गठबंधन के नेताओं ने आंदोलन की आड़ में अराजकता फैलाने वाले तत्वों पर सख्त कार्रवाई का आवेदन सौंपा, वहीं निर्दोष छात्रों को सुरक्षा देने का आश्वासन दिया।

​इस प्रतिनिधिमंडल में झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा-माले के वरिष्ठ नेता शामिल थे—जिनमें विनोद पांडे, राजेश ठाकुर, केशव महतो कमलेश, ममता देवी, राजेश कच्छप, एमटी राजा, विकास मुंडा, सुरेश बैठा और मनोज यादव प्रमुख रहे।

​झामुमो महासचिव विनोद पांडे ने साफ किया कि शांतिपूर्ण आंदोलन करने वाले छात्रों के साथ सरकार खड़ी है और उन पर दर्ज एफआईआर के आधार पर कोई गलत कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, हिंसा और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने बीजेपी की 48 घंटे की चेतावनी को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि आंदोलन में कुछ राजनीतिक चेहरों ने छात्रों के कंधे पर बंदूक रखकर राज्य का माहौल खराब करने की कोशिश की है।

राजद प्रतिनिधि मनोज यादव ने कहा कि भीड़ में शामिल उपद्रवियों की पहचान सीसीटीवी फुटेज के जरिए कर उन पर कानूनी शिकंजा कसा जाना चाहिए, ताकि असली अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहें।

उल्लेखनीय है कि बुधवार को बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव से मिलकर मांग की थी कि आंदोलनकारी छात्रों पर दर्ज सभी मुकदमे तुरंत वापस लिए जाएं और सरकार को 48 घंटे की मोहलत दी थी। इसके ठीक बाद इंडिया गठबंधन के इस कदम से राज्य का सियासी पारा चढ़ गया है।