रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ जिले में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां छिन्नमस्तिका मंदिर (रजरप्पा) परिसर के सौंदर्यीकरण, बुनियादी सुविधाओं के विकास और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं। एक अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने ₹102 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी परियोजना की धीमी प्रगति पर गहरा असंतोष और चिंता व्यक्त की। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मंदिर परिसर के कायाकल्प के लिए लगभग ₹102 करोड़ की विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार की जा चुकी है। इस पर हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि डीपीआर बनने के बाद भी धरातल पर काम की रफ्तार संतोषजनक नहीं है। इतने महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल के विकास में अनावश्यक देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अदालत ने संबंधित विभागों को तय योजना के अनुसार काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।अदालत ने मंदिर परिसर में व्यापार करने वाले स्थानीय दुकानदारों के हितों की रक्षा पर भी जोर दिया। हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि जो 254 दुकानदार पहले से वहां अपना व्यवसाय कर रहे थे, उन्हें बिना किसी देरी के नई दुकानें आवंटित की जाएं। अदालत ने कहा कि विकास कार्यों के साथ-साथ वर्षों से जीवन-यापन कर रहे लोगों की आजीविका सुरक्षित रखना भी बेहद जरूरी है।

बरसात में नदी के पानी से सुरक्षा और डीसिल्टिंग के निर्देश

श्रद्धालुओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए अदालत ने कहा कि मानसून के दौरान खरकई/भैरवी नदी का जलस्तर बढ़ने से मंदिर परिसर में पानी घुसने का खतरा बना रहता है। हाईकोर्ट ने सरकार को समय रहते नदी की डीसिल्टिंग (गाद सफाई) कराने और पुख्ता सुरक्षा इंतजाम करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी अनहोनी या दुर्घटना से बचा जा सके।

धार्मिक पर्यटन को मिलेगी नई पहचान

मां छिन्नमस्तिका मंदिर देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है, जहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं। ₹102 करोड़ की इस परियोजना के पूर्ण होने से मंदिर परिसर में आधुनिक नागरिक सुविधाएं, व्यवस्थित बाजार, सुगम यातायात और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध होगा, जिससे राज्य में धार्मिक पर्यटन को एक नया आयाम मिलेगा।