रांची। झारखंड में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और पोषण से जुड़ी 'प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना' (पीएमएमवीवाई) को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा गया है। हाल ही में चलाए गए देशव्यापी स्पेशल ड्राइव (15 जून से 15 जुलाई) में झारखंड ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे देश में पहला स्थान हासिल किया है।

राज्य को इस अभियान के तहत 40,692 महिलाओं के पंजीकरण का लक्ष्य दिया गया था। इसके मुकाबले 114.61% की सफलता दर दर्ज करते हुए कुल 46,635 महिलाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन कराया, जो तय लक्ष्य से 5,943 अधिक है।

योजना के लिए राज्यभर के 38,059 आंगनबाड़ी केंद्रों की मैपिंग की गई थी। धनबाद, गिरिडीह, बोकारो और लोहरदगा जैसे जिलों में आंगनबाड़ियों का प्रदर्शन बेहतरीन रहा और वहां महज 6% केंद्र ही सुस्त रहे। इसके विपरीत पाकुड़ (36%), गोड्डा (33%) और सिमडेगा-खूंटी (30-30%) के आंगनबाड़ी केंद्रों में सक्रियता की भारी कमी दिखी। अधिकारियों के अनुसार जागरुकता की कमी, बुजुर्ग सेविकाओं में तकनीकी (डिजिटल) ज्ञान का अभाव और पोर्टल पर एंट्री करने का सही तरीका मालूम न होना इसकी मुख्य वजहें रहीं। राज्य के 6,210 केंद्र ऐसे भी रहे जहां एक भी लाभुक का पंजीकरण नहीं हो पाया।

क्या है योजना और कितनी मिलती है मदद?

यह योजना गर्भवती और धात्री (स्तनपान कराने वाली) माताओं के बेहतर पोषण और स्वास्थ्य के लिए आर्थिक मदद देती है। पहली संतान होने पर निर्धारित शर्तों के साथ कुल 5,000 की सहायता (पहली किस्त में 3,000 और दूसरी किस्त में 2,000)। दूसरी संतान बेटी होने पर सरकार की ओर से 6,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि दी जाती है।

समाज कल्याण निदेशक किरण कुमारी पासी ने राज्य के इस प्रदर्शन पर खुशी जताई है।