रांची। ऐतिहासिक बड़कागढ़ स्टेट की दुर्गा पूजा की परंपरा के तहत महासप्तमी के दिन मां भगवती चिंतामणि और देवी नवपत्रिका की भव्य शोभा यात्रा निकाली गई। बांस की डोली में विराजित मां को पारंपरिक रीति-रिवाज, मंत्रोच्चार, शंख-घंट, ढोल-नगाड़े और शहनाई की गूंज के साथ ऐतिहासिक ठाकुर निवास बड़कागढ़ जगन्नाथपुर से प्राचीन देवी घर लाया गया।
वर्ष 1880 से चली आ रही इस परंपरा के अनुसार मां की डोली को बड़कागढ़ राजपरिवार की बहुओं की साड़ियों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था। शोभा यात्रा के मार्ग को स्थानीय ग्रामीणों, रांची नगर निगम के कर्मचारियों और एक मुस्लिम परिवार द्वारा झाड़ू लगाकर और पानी से धोकर पूरी तरह पवित्र किया गया। इस दौरान पूरा इलाका मां के जयकारों से गूंज उठा।
प्राचीन देवी घर पहुंचने पर मां भगवती नवपत्रिका की बाहरी पूजा और अनुष्ठान संपन्न हुआ, जहां मां को बकरे की बलि दी गई। इसके बाद मां भगवती चिंतामणि और नवपत्रिका देवी की संयुक्त पूजा तांत्रिक पद्धति से शुरू हुई, जिसमें एक बार फिर मां को बकरे की बलि दी गई और मां भगवती की सात आरतियां उतारी गईं।
इस धार्मिक अनुष्ठान में बड़कागढ़ स्टेट के राजपरिवार के सदस्यों के साथ-साथ जगन्नाथपुर, आणि, भूसुर, लटमा और मौसीबाड़ी के सैकड़ों श्रद्धालु मां के दर्शन और पूजा के लिए जुटे। आन्नी मौजा स्थित प्राचीन देवी घर में यह पूजा बड़कागढ़ के पुरोहित सदन गोपाल शर्मा ने संपन्न कराई, जबकि पूजा के यजमान बड़कागढ़ के ठाकुर सुधांशु नाथ शाहदेव रहे। परंपरा के अगले चरण में अब महाअष्टमी पूजा के दौरान महाहवन किया जाएगा।
