रांची। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में कांग्रेस नेताओं ने उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि दिशोम गुरु का पूरा जीवन झारखंड की पहचान, जल-जंगल-जमीन की रक्षा, आदिवासी-मूलवासी समाज के अधिकारों तथा गरीब, किसान, मजदूर और वंचित वर्ग के सम्मान की लड़ाई को समर्पित रहा। उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार दिशोम गुरु के विचारों और जनकल्याणकारी सोच को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

केशव महतो कमलेश ने कहा कि कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा और महागठबंधन के सभी सहयोगी दल सामाजिक न्याय, धर्मनिरपेक्षता और संविधान की रक्षा के साझा संकल्प के साथ राज्य के विकास के लिए कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जब संविधान की मूल भावना, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक सौहार्द को चुनौती देने की कोशिशें हो रही हैं, तब दिशोम गुरु के विचार और संघर्ष पहले से अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद नेताओं ने भी उनके योगदान को झारखंड के इतिहास में अमिट बताते हुए उन्हें प्रेरणास्रोत बताया।

इस अवसर पर लोहरदगा विधायक डॉ. रामेश्वर उरांव के आवास पर भी श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। डॉ. उरांव ने बताया कि उनकी पहली मुलाकात दिशोम गुरु शिबू सोरेन से 30 जून 1976 को आपातकाल के दौरान सिद्धू-कान्हू के गांव में हुई थी, जिसके बाद दोनों के बीच गहरा आत्मीय संबंध बना रहा। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु ने 1973 में संगठन का निर्माण कर झारखंड आंदोलन को नई दिशा दी और जीवन के अंतिम समय तक झारखंड, आदिवासी अस्मिता तथा जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए संघर्ष करते रहे। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा।