रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं और जारी सीआईडी जांच के बीच आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। मीडिया से बातचीत में उन्होंने खुद पर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में उनकी कोई गलत भूमिका नहीं थी। उन्होंने निष्पक्ष जांच की उम्मीद जताते हुए कहा कि जांच एजेंसियों के माध्यम से ही वास्तविक सच्चाई सामने आ सकेगी।
एल. खियांग्ते ने कहा कि यदि परीक्षा में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो जांच एजेंसियों को इसकी गहराई से जांच करनी चाहिए और जो भी अधिकारी या संस्था दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी अपने पद का इस्तेमाल मनमाने फैसलों के लिए नहीं किया। उनके अनुसार परीक्षा का आयोजन, उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और साक्षात्कार की प्रक्रिया तय नियमों और मानकों के तहत ही पूरी की गई थी।
6 मार्च 2025 को अध्यक्ष पद संभालने का जिक्र करते हुए खियांग्ते ने कहा कि आयोग की पुरानी छवि को देखते हुए यह पद उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था। उन्होंने इसे एक अवसर के रूप में लिया और आयोग की धीमी कार्यप्रणाली में सुधार, बैकलॉग क्लियरेंस और लंबित नियुक्तियों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया। उनके अनुसार उनके कार्यकाल में सभी फैसले निर्धारित नियमों के तहत ही लिए गए।
प्रारंभिक परीक्षा (पीटी) के परिणाम पर आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर न होने के सवाल पर पूर्व चेयरमैन ने 'रूल ऑफ प्रोसीजर 2002' का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि पीटी और मेन्स के नतीजे जारी करने के लिए सभी सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं होते। अंतिम परिणाम से पहले सदस्य स्क्रूटनी करते हैं, जिसके बाद चेयरमैन की मंजूरी ली जाती है। उन्होंने कहा कि केवल आरोपों के आधार पर किसी को दोषी ठहराना सही नहीं है।
भर्ती में पदों की खरीद-बिक्री के आरोपों पर चिंता व्यक्त करते हुए खियांग्ते ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली। उन्होंने दावा किया कि परीक्षा की गोपनीयता बनाए रखने के लिए उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रखा गया था और कोडिंग के जरिए अभ्यर्थियों की पहचान छिपाई गई थी। उन्होंने सीट बेचने के आरोपों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ है, तो जांच के जरिए दोषियों को चिन्हित कर कार्रवाई की जानी चाहिए।
परीक्षा संचालन के लिए किसी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को जिम्मेदारी देने के आरोप पर खियांग्ते ने कहा कि एजेंसी का चयन पूरे रिकॉर्ड और नियमों की जांच के बाद किया गया था। उनके कार्यकाल में ऐसी किसी एजेंसी को काम नहीं सौंपा गया। सीआईडी पूछताछ का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि जांच टीम ने उनसे सवाल किए हैं और वे जांच प्रक्रिया में पूरा सहयोग कर रहे हैं।
गौरतलब है कि 14वीं जेपीएससी परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद एल. खियांग्ते ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद सीआईडी ने उनके आवास पर छापेमारी भी की थी, और मामले में आगे की पूछताछ के लिए आज उन्हें सीआईडी कार्यालय बुलाए जाने की सूचना है।
