रांची। पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने नीट पेपर लीक मामले पर कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को निशाने पर लिया है। शनिवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि यहां झारखंड में जेपीएससी परीक्षाओं में गड़बड़ी हुई है। उत्पाद सिपाही परीक्षा में एक दर्जन आदिवासी, स्थानीय युवकों की जान गयी। अगर सचमुच कांग्रेस, राजद और वाम दलों को छात्र हित की चिंता है तो वह सरकार की पालकी ढोना छोड़ दे। समर्थन वापस ले। साथ ही रघुवर दास ने 14वीं जेपीएससी परीक्षा के अलावा अन्य परीक्षाओं की भी सीबीआई जांच की मांग की।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में राहुल गांधी नीट पेपर लीक प्रकरण में जान गंवाने वाले 23 स्टूडेंट के लिए शोक जताने राजघाट गए। पर झारखंड में आधी अधूरी तैयारियों के बीच ली गयी उत्पाद सिपाही परीक्षा में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के लिए कुछ नहीं कहा। रघुवर ने मांग करते हुए कहा कि इन अभ्यर्थियों के परिजन को भी राज्य सरकार 1-1 करोड़ रुपए का मुआवजा दे।
रघुवर दास ने सवाल उठाया कि आखिर यूपी में ब्लैक लिस्टेड एजेंसी टीडीसीएल कम्पनी को जेपीएससी परीक्षा के संचालन का जिम्मा कैसे मिला। इस एजेंसी को 2025 में जेएसएससी ने प्रतिबंधित कर दिया था पर जेपीएससी ने इसे नहीं देखा। इस पूरे मामले की सीबीआई जांच हो।
मौके पर मीडिया प्रभारी योगेन्द्र सिंह और प्रवक्ता अभय सिंह भी उपस्थित थे।
पेपर लीक में दोषी मुख्यमंत्री हेमंत दें इस्तीफाः आदित्य साहू
रांची। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने झारखंड में जैक, जेपीएससी और जेएसएससी में हुई गड़बड़ी तथा पेपर लीक मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस्तीफा मांगा है। सोशल मीडिया पर इसकी मांग करते हुए उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में जान गंवानेवाले अभ्यर्थियों की भी नैतिक जिम्मेदारी लेने को कहा है। उनके अनुसार, इसके लिए झारखंड की झामुमो–कांग्रेस सरकार के मंत्रियों को भी अविलंब इस्तीफा देना चाहिए। झारखंड में शिक्षा विभाग स्वयं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पास है। ऐसे में उनकी सहमति और जवाबदेही के बिना उनके विभाग में इतने बड़े घोटाले का होना संभव नहीं। आदित्य साहू ने कहा कि देशभर में छात्र हितों की कथित राजनीति करने का दावा करनेवाले राहुल गांधी को भी अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। यदि उन्हें वास्तव में छात्रों की इतनी ही चिंता है, तो झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के मुद्दे पर नैतिकता दिखाते हुए झामुमो सरकार से समर्थन अविलंब वापस लेना चाहिए।
