​रांची। झारखंड प्रदेश भाजपा अध्यक्ष आदित्य साहू ने राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस-झामुमो सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास और विनियमन) अधिनियम के मुद्दे पर बेजा राजनीति करके भर्ती परीक्षाओं में हुई धांधली के असली 'मास्टरमाइंड' को बचाने और छात्रों के आंदोलन से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है।

​आदित्य साहू ने कहा कि एमएमडीआर अधिनियम राज्य के हित में है और इससे सत्तारूढ़ दल की काली कमाई पर रोक लग रही है, जिसके कारण उनकी छटपटाहट साफ दिख रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमएमडीआर पर बेवजह का शोर मचाने से छात्रों के मूल सवाल खत्म नहीं होंगे। भर्ती परीक्षाओं की सीबीआई जांच की मांग पूरी हुए बिना यह छात्र आंदोलन थमने वाला नहीं है।

​प्रदेश अध्यक्ष ने भर्ती व्यवस्था में बड़े पैमाने पर जारी भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जेपीएससी अध्यक्ष पद की बोली 70 करोड़ रुपये में लग रही है। इतनी बड़ी डील किसी छोटे नेता या संगठन के बूते की बात नहीं है, इसमें सत्ता के शीर्ष नेतृत्व का हाथ होना तय है। इसी डर से सरकार की सांसें अटकी हुई हैं।

​उन्होंने सीआईडी जांच को महज दिखावा करार देते हुए कहा कि कार्रवाई केवल अखबारों की सुर्खियों तक सीमित है। छात्रों में भ्रम बनाए रखने के लिए रोजाना खबरें लीक की जा रही हैं। अगर सरकार गंभीर है, तो जांच का दायरा सीमित क्यों है और बड़ी मछलियों पर हाथ डालने से सीआईडी क्यों बच रही है?

​आदित्य साहू ने कहा कि राज्य के युवा पारदर्शी भर्ती और समयबद्ध नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार जवाब देने के बजाय नया राजनीतिक मुद्दा खोजने में जुटी है। उन्होंने मांग की कि कांग्रेस और झामुमो पहले युवाओं को रोजगार और वादों पर जवाब दें, फिर अन्य मुद्दों पर राजनीति करें। भाजपा छात्रों के भविष्य का सौदा नहीं होने देगी और इस आंदोलन को उसके अंतिम मुकाम तक पहुंचाने के लिए छात्रों के साथ मजबूती से खड़ी रहेगी।