नेमरा (रामगढ़)। "माँ केवल एक शब्द नहीं, संपूर्ण जीवन का संबल और त्याग की वेला में असीम संवेदना का वो दीप है, जो बुझकर भी हमेशा पथ आलोकित करता रहता है।"
इसी अपूरणीय क्षति और गहरे शोक के बीच झारखंड ने अपनी एक ममतामयी छांव खो दी। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने गुरुवार को अत्यंत गमगीन माहौल में अपनी पूज्यनीय माता दिवंगत रूपी सोरेन को अश्रुपूर्ण नेत्रों से अंतिम विदाई दी। रामगढ़ जिले के पैतृक गाँव नेमरा स्थित श्मशान घाट पर पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूर्ण सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। जैसे ही मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कांपते हाथों और नम आँखों से अपनी माँ को मुखाग्नि दी, वहाँ मौजूद हज़ारों लोगों का हृदय दहल उठा और पूरा वातावरण शोक संवेदनाओं से भर गया।

दिवंगत रूपी सोरेन के पार्थिव शरीर का अंतिम दर्शन करने और उन्हें अपनी अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए नेमरा गाँव में जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज के क्षेत्रों से आए सैकड़ों ग्रामीणों, समर्थकों, विभिन्न राजनीतिक दलों के दिग्गजों और प्रशासनिक अधिकारियों ने शव यात्रा में पैदल चलकर श्मशान घाट तक का सफर तय किया। गाँव का हर एक नागरिक इस दुःखद बेला में सोरेन परिवार के साथ खड़ा नजर आया। हर कोई नम आँखों से अपनी माँ-तुल्य अभिभावक की यादों और उनके जीवन मूल्यों को नमन कर रहा था।
झारखंड आंदोलन के कठिन दौर से लेकर जीवन के अंतिम क्षणों तक दिवंगत रूपी सोरेन सादगी, त्याग और अटूट संघर्ष की प्रतिमूर्ति बनी रहीं। उन्होंने न केवल अपने पारिवारिक दायित्वों को निष्ठापूर्वक निभाया, बल्कि संपूर्ण झारखंडी समाज के लिए एक संबल और मार्गदर्शक की भूमिका निभाई। उनके जाने से राज्य ने एक ममतामयी माँ और अभिभावक को खो दिया है।
इस अत्यंत दुखद क्षण में सामाजिक, राजनीतिक और प्रशासनिक जगत की तमाम हस्तियों व आम नागरिकों ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन तथा उनके परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं और ईश्वर से दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान देने की प्रार्थना की है।
