गुमला। आदिवासी नेत्री निशा भगत का पार्थिव शरीर शनिवार को चैनपुर प्रखंड के उनके पैतृक गांव उरु में नदी किनारे पंचतत्व में विलीन हो गया। पिता हंदू भगत ने कांपते हाथों से बेटी को मुखाग्नि दी, जिसे देख वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं। अंतिम विदाई के इस गमगीन माहौल के साथ ही निशा की मौत की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग को लेकर लोगों का आक्रोश सड़क पर साफ दिखाई दिया।

अंतिम संस्कार से पहले निशा भगत के पार्थिव शरीर को लेकर बड़ी संख्या में लोग गुमला के टावर चौक पहुंचे। हाथों में पोस्टर और बैनर थामे प्रदर्शनकारियों ने झारखंड सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। लोगों ने इस पूरी घटना को आत्महत्या के लिए उकसाने का गंभीर मामला बताते हुए आरोपितों की तत्काल गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग की। प्रदर्शन के दौरान स्थानीय लोगों और समर्थकों में भारी गुस्सा देखने को मिला।

नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने निशा के गुमला स्थित आवास पहुंचकर उनके पिता हंदू भगत से मुलाकात की और घटना की पूरी जानकारी ली। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने इस पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की जोरदार मांग की।

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार को स्वतः संज्ञान लेते हुए सीबीआई जांच की अनुशंसा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि निशा को पहले से धमकियां मिल रही थीं। चार महीने पहले पिठौरिया स्थित उनके घर में लूटपाट की घटना हुई थी, जिसकी प्राथमिकी दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि निशा को लगातार प्रताड़ित करने और उनके खिलाफ चलाए गए दुष्प्रचार की भी गहन जांच होनी चाहिए। मरांडी के अनुसार, निशा जनजातीय समाज और सनातन परंपराओं के मुद्दों पर मुखर थीं और उनका किसी राजनीतिक दल या संगठन से सीधा संबंध नहीं होने के बावजूद उन्हें निशाना बनाया गया।

अंतिम संस्कार में शामिल हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसे महज एक बेटी की मौत नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल करार दिया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए, अन्यथा जनआक्रोश और अधिक उग्र रूप ले लेगा।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने आरोप लगाया कि निशा लगातार न्याय के लिए गुहार लगा रही थीं, लेकिन उन्हें समय रहते सरकारी मदद या सुरक्षा नहीं मिल पाई। पूर्व सांसद गीता कोड़ा ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सरकार आम जनता को सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

निशा भगत को अंतिम विदाई देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी, मधु कोड़ा, रघुवर दास, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, गुमला विधायक भूषण तिर्की, पूर्व विधायक शिवशंकर उरांव, देवेंद्र उरांव और विनय लाल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।