​रांची। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने सोमवार को राजधानी रांची में 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा निकाली। इस दौरान भाजपा नेताओं ने सत्तारूढ़ दल झामुमो, कांग्रेस और राजद पर गहन पुनरीक्षण अभियान (एसआईआर) को लेकर भ्रम फैलाने और देश में अराजकता का माहौल पैदा करने का आरोप लगाया।

​यह पदयात्रा बापू बाटिका से प्रारंभ होकर बिरसा मुंडा संग्रहालय तक पहुंची, जहां यह एक विशाल जनसभा में बदल गई। जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल उरांव ने दावा किया कि वर्ष 2029 में झारखंड से कांग्रेस और इंडी गठबंधन की विदाई तय है।

केंद्रीय मंत्री जुएल उरांव ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने सवाल किया कि जिस ईवीएम प्रणाली के जरिए झारखंड में चुनाव हुए और झामुमो-कांग्रेस सत्ता में आई, उसी मतदान प्रणाली का विरोध करने झारखंड के मुख्यमंत्री और कांग्रेसी दिल्ली क्यों जा रहे हैं? कांग्रेस को इसका जवाब देना चाहिए।

प्रदेश प्रभारी सह राष्ट्रीय महामंत्री गजेंद्र सिंह पटेल ने कहा कि कांग्रेस देश को नेपाल और बांग्लादेश के रास्ते पर ले जाना चाहती है, जिसे भारत की जनता कभी स्वीकार नहीं करेगी।

​विपक्ष की नीतियां पूरी तरह विफल: भाजपा नेता

प्रदेश अध्यक्ष ​आदित्य साहू ने कहा कि झारखंड में 'मइयां सम्मान योजना' पूरी तरह विफल हो चुकी है। राज्य के नेताओं से शासन संभल नहीं रहा और वे दिल्ली में जाकर प्रदर्शन कर रहे हैं।

नेता प्रतिपक्ष ​बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राहुल गांधी देश में अराजकता का माहौल बनाना चाहते हैं। आज देश को राहुल गांधी की राजनीति, उग्रवाद, घुसपैठियों और दिमागी नक्सलियों से गंभीर खतरा है।

पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आज देश की जनता राष्ट्रविरोधी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दे रही है। राष्ट्र सेवा भाजपा कार्यकर्ताओं का मूल सिद्धांत है। हम उन महापुरुषों और वीर सपूतों के वंशज हैं, जिनके पूर्वजों ने तलवारों की धार और अंगारों पर चलकर देश की आजादी और उसकी अस्मिता की रक्षा की। राष्ट्र की एकता, अखंडता और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए भाजपा का प्रत्येक कार्यकर्ता प्रतिबद्ध है।

​सरयू राय (जदयू विधायक) ने इस अवसर पर कहा कि एनडीए पूरी तरह लोकतांत्रिक तरीके से राजनीति करता है। विपक्ष मॉक पार्लियामेंट करके यही संदेश दे रहा है कि शायद वे अगली बार संसद तक भी न पहुंच पाएं।

पदयात्रा में केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रविन्द्र राय, दीपक प्रकाश, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद, बालमुकुंद सहाय, भानु प्रताप शाही, महामंत्री मनोज सिंह, विधायक सीपी सिंह, मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल, सुनीता सिंह, अमित सिंह, दीपक बंका, हेमन्त दास, सूरज चौरसिया, रोशनी खलखो, नीरज कुमार, मीरा मुंडा, प्रदेश मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह, मुख्य प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव, राहुल अवस्थी, सूरज शाहदेव, सतीश सिन्हा, नीरज सिंह, तारिक इमरान, अजय राय, रामाकांत महतो, दीनदयाल वर्णवाल, अशोक बड़ाइक, आरती कुजूर, शोभा यादव, संदीप वर्मा, केके गुप्ता, रविनाथ किशोर, प्रदीप सिन्हा, अजय शाह, राफिया नाज, राहुल शाहदेव, रजनीश पांडेय, रांची महानगर अध्यक्ष वरुण साहू, विनय धीरज महतो, नरेंद्र सिंह, समरी लाल, रामकुमार पाहन, संजीव विजयवर्गीय, सुरेंद्र महतो, सीमा सिंह, सन्नी टोप्पो, शशांक राज, मनोज महतो, रंजय कुमार, जदयू के धर्मेंद्र तिवारी,सुबोध सिंह, रमेश सिंह, ललित ओझा, अमरनाथ चौधरी, मानकी राजेन्द्र सिंह मुंडा, कृपा शंकर सिंह, जैलेंद्र चौधरी, मनोज मिश्रा, कर्नल बीके सिंह, बलराम सिंह, राजू सिंह, जितेंद्र वर्मा, मनोज चौधरी, सत्यदेव मुंडा, अर्जुन राम, प्रभुदयाल बड़ाइक, रणधीर चौधरी, बलसाय, सुमन कुमार, ऋषिकेश राणा सहित हजारों की संख्या में पुरुष-महिला नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

भाजपा का ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ अभियान राजनीतिक पाखंडः केशव महतो कमलेश

रांची। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने भाजपा द्वारा सोमवार को आयोजित ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ पदयात्रा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा की यह पदयात्रा लोकतंत्र बचाने का कोई गंभीर प्रयास नहीं, बल्कि राजनीतिक पाखंड और महज एक राजनीतिक फोटोशूट है। भाजपा का लोकतंत्र प्रेम पूरी तरह दिखावटी है। केशव महतो ने कहा कि अगर भाजपा वास्तव में लोकतंत्र बचाना चाहती है और देश से अराजकता हटाना चाहती है, तो उसे सबसे पहले चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठ रहे गंभीर सवालों का जवाब देना चाहिए। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा लेने की मांग करनी चाहिए। श्री कमलेश ने कहा कि भाजपा को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किस लोकतंत्र को बचाने और किस अराजकता को हटाने की बात वह कर रही है? जिस देश में मतदाताओं के मताधिकार पर सवाल उठ रहे हों, चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता संदेह के घेरे में हो और विपक्ष लगातार लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही की मांग कर रहा हो, वहां भाजपा की पदयात्रा जनता की आंखों में धूल झोंकने के अलावा कुछ नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा एक तरफ लोकतंत्र बचाने का नारा लगाती है, दूसरी तरफ दुष्यंत कुमार और हरदीप पुरी जैसे लोगों को राज्यपाल और मंत्री जैसे संवैधानिक एवं महत्वपूर्ण पदों पर बनाए रखकर लोकतंत्र और संवैधानिक मर्यादाओं की बात करती है। भाजपा को पहले अपने राजनीतिक आचरण और सत्ता के चरित्र पर आत्ममंथन करना चाहिए, उसके बाद लोकतंत्र बचाने का उपदेश देना चाहिए।