नई दिल्ली/रांची। सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा (प्रारंभिक) परीक्षा में कथित अनियमितताओं और धांधली की स्वतंत्र व समयबद्ध सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका पर केंद्र सरकार और झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में भारत सरकार, झारखंड सरकार, झारखंड लोक सेवा आयोग, सीबीआई और अन्य संबंधित पक्षों से अपना पक्ष रखने को कहा है। यह याचिका हरिशरण देवगण की ओर से अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की गई है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा ने अदालत से सीबीआई जांच या सुप्रीम कोर्ट के किसी पूर्व न्यायाधीश से मामले की जांच कराने का अनुरोध किया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने पूर्व न्यायाधीश से जांच की मांग को खारिज करते हुए टिप्पणी की कि यह जांच और फोरेंसिक टेस्ट का विषय है।
याचिका में कहा गया है कि विज्ञापन संख्या 01/2026 के तहत 19 अप्रैल 2026 को आयोजित जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा की अखंडता, निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। इसलिए जनहित में अदालत के तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए मामले को राज्य की सीआईडी से सीबीआई को सौंपने का अनुरोध किया गया है, ताकि लोक सेवकों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की सही जांच हो सके।
याचिकाकर्ता के अनुसार इस विवाद को केवल व्यक्तिगत उम्मीदवारों या छिटपुट मामलों तक सीमित नहीं देखा जा सकता। इसमें प्रश्नपत्रों की छपाई, कोडिंग, भंडारण, परिवहन, परीक्षा केंद्र तक वितरण, ओएमआर शीट के संकलन, स्कैनिंग, डिजिटल डेटा और परिणाम जारी करने तक की पूरी प्रक्रिया की जांच की जरूरत है।
याचिका में मांग की गई है कि साक्ष्यों से छेड़छाड़ रोकने के लिए मूल और उम्मीदवार कॉपी वाली ओएमआर शीट, सीसीटीवी फुटेज और सर्वर ऑडिट लॉग जैसे सभी भौतिक व डिजिटल सबूतों को तुरंत सुरक्षित किया जाए।
याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि वे केवल मीडिया रिपोर्टों या विरोध प्रदर्शनों के आधार पर परीक्षा रद्द करने की मांग नहीं कर रहे हैं। मुख्य उद्देश्य सीबीआई द्वारा एक निष्पक्ष और वैज्ञानिक जांच कराना है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या यह प्रारंभिक परीक्षा सार्वजनिक नियुक्तियों का वैध आधार बनने के लिए आवश्यक न्यूनतम निष्पक्षता और संस्थागत अखंडता को बनाए रख सकी है या नहीं।
जेपीएससी एसीएफ-रेंजर परीक्षा रद्द करने पर हाईकोर्ट का रोक से इनकार, राज्य सरकार से मांगा जवाब
झारखंड हाईकोर्ट ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित सहायक वन संरक्षक (एसीएफ) और वन क्षेत्र पदाधिकारी (रेंजर) प्रतियोगिता परीक्षा को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर सोमवार को तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया।
जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलें सुनने के बाद राज्य सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत के इस रुख के बाद फिलहाल सरकार का परीक्षा रद्द करने का आदेश प्रभावी रहेगा और याचिकाकर्ता को कोई अंतरिम राहत नहीं मिली है।
मामले की अगली सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
