रामगढ़। पूर्व सांसद जयंत सिन्हा ने सोमवार को रामगढ़ के लॉ गैरिटल होटल में प्रेसवार्ता कर जिले में हाल के औद्योगिक हादसों, श्रमिकों की सुरक्षा, मुआवजा, प्रशासनिक निगरानी और प्रदूषण के मुद्दे पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास जरूरी है, लेकिन इसकी कीमत श्रमिकों की जान और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य से नहीं चुकाई जा सकती।
जयंत सिन्हा ने कहा कि जिन औद्योगिक हादसों की जांच लंबित है, उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जिन मामलों में जांच पूरी हो चुकी है, उनकी रिपोर्ट, कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को मिले मुआवजे की स्थिति सार्वजनिक की जानी चाहिए। उन्होंने ठेका एवं संविदा श्रमिकों के पीएफ, ईएसआई, बीमा और अन्य वैधानिक अधिकारों का अनुपालन सुनिश्चित करने की मांग की।
उन्होंने 6 अप्रैल को हेसला स्थित झारखंड इस्पात प्राइवेट लिमिटेड में हुए भट्ठी हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि घटना में नौ श्रमिक झुलसे थे, जिनमें इलाज के दौरान पांच की मौत हो गई। वहीं 9 अगस्त को श्रीराम पावर एंड स्टील, मुरपा-कुज्जू में हुए हादसे में नौ श्रमिक घायल हुए और एक की इलाज के दौरान मौत हो गई। मां छिन्नमस्तिका सीमेंट एंड इस्पात, हेहल की दुर्घटना में तीन इंजीनियरों की मौत और एक कर्मचारी के घायल होने का मामला भी उन्होंने उठाया।
जयंत सिन्हा ने कहा कि प्रत्येक गंभीर हादसे के बाद यह पता लगाना जरूरी है कि दुर्घटना के कारण क्या थे, जांच में क्या सामने आया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए। उन्होंने औद्योगिक क्षेत्रों में नियमित सुरक्षा निरीक्षण, प्रदूषण की निगरानी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इन मामलों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं करती है, तो वे संबंधित केंद्रीय मंत्रियों के समक्ष मामले को उठाएंगे। उन्होंने कहा कि ठेका एवं संविदा श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।
पूर्व विधायक शंकर चौधरी ने फैक्ट्री प्रबंधन और जिला प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि रामगढ़ में फैक्ट्री और ट्रांसपोर्टिंग से होने वाला प्रदूषण आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि प्रशासन ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो इसके खिलाफ जोरदार आंदोलन किया जाएगा।
