रांची। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच ने सरकार और पुलिस प्रशासन पर छात्र आंदोलन की आवाज दबाने और युवाओं की एकता को तोड़ने का आरोप लगाया है। बुधवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान मंच की सदस्य अमीषा प्रसाद ने अपने खिलाफ दर्ज मामलों और पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।
अमीषा प्रसाद ने स्पष्ट किया कि छात्रों के आंदोलन का मकसद किसी मुख्यमंत्री, राजनीतिक दल या समुदाय विशेष को निशाना बनाना नहीं है। उनका विरोध भ्रष्टाचार, सिस्टम की गड़बड़ी और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर है। उन्होंने कहा कि युवाओं को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का संवैधानिक अधिकार है। अगर किसी प्रदर्शनकारी पर गंभीर आरोप हैं, तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दर्ज मुकदमों का आधार सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अमीषा ने बताया कि 18 अगस्त को एससी/एसटी से जुड़े एक मामले में उन्हें जमानत मिल चुकी थी। इसके बावजूद बिना पर्याप्त जानकारी या नोटिस दिए पुलिस उन्हें दोबारा ले गई और बाद में अन्य मामलों का हवाला दिया। उन्होंने पूछताछ के दौरान मीडिया की मौजूदगी और वीडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया पर भी आपत्ति जताई।
सैमफोर्ड अस्पताल में हुई कथित घटना में अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए अमीषा ने कहा कि उन्होंने किसी तरह की तोड़फोड़ या मारपीट नहीं की है। सच्चाई सामने लाने के लिए प्रशासन को घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज तुरंत सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने अपील की कि आंदोलन को राजनीतिक या सामुदायिक रंग देने के बजाय प्रशासन को युवाओं की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।
