रांची। एमएमडीआर (खान एवं खनिज विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में झारखंड की सियासत गरमा गई है। केंद्र सरकार के इस कानून के खिलाफ प्रदेश कांग्रेस ने गुरुवार 27 अगस्त को राज्यभर में व्यापक ‘हल्लाबोल’ कार्यक्रम का आयोजन किया है। राजधानी रांची समेत राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में पार्टी कार्यकर्ता विरोध प्रदर्शन कर जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपेंगे।
इस आंदोलन के जरिए कांग्रेस केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के साथ-साथ झारखंड के आर्थिक अधिकारों और “चंदा चोरी” से जुड़े मुद्दों पर पारदर्शिता एवं जवाबदेही की मांग उठाएगी।
राजधानी रांची में जिला कांग्रेस का मुख्य जुलूस मोरहाबादी स्थित बापू वाटिका से शुरू होकर उपायुक्त कार्यालय तक जाएगा। इसी तर्ज पर राज्य के अन्य जिलों में भी डीसी कार्यालयों के समक्ष धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। प्रदेश कांग्रेस ने सभी जिला इकाइयों को कार्यक्रम की सफलता के लिए जरूरी दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं।
पार्टी पदाधिकारियों ने कार्यकर्ताओं, युवाओं, छात्रों, श्रमिकों, सामाजिक संगठनों और आम जनता से इस जनआंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक कानून के खिलाफ नहीं, बल्कि झारखंड के हितों, खनिज संपदा और राज्य के संघीय अधिकारों की रक्षा की है।
नेताओं ने स्पष्ट किया कि झारखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में 'मिनरल्स बियरिंग लैंड सेस' से लगभग ₹14,000 करोड़ का राजस्व मिलने का अनुमान लगाया है। हालांकि, नए एमएमडीआर बिल के जरिए केंद्र सरकार राज्य के इस महत्वपूर्ण वित्तीय स्रोत को सीमित करने का प्रयास कर रही है, जो प्रदेश की आर्थिक स्वायत्तता पर सीधा आघात है। इससे राज्य की विकास योजनाओं पर सीधा असर पड़ेगा।
