रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने वर्ष 2015 की सिपाही बहाली से जुड़े एक मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) और राज्य सरकार को कड़ा निर्देश दिया है। अदालत ने पूछा है कि शारीरिक जांच, मेडिकल जांच और लिखित परीक्षा जैसे सभी चरणों में सफल होने के बावजूद प्रार्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा क्यों नहीं की गई। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार और आयोग को इस पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई 9 दिसंबर को होगी। नियुक्ति की मांग को लेकर याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सुनवाई के दौरान प्रार्थियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शेखर प्रसाद गुप्ता ने अदालत को बताया कि जेएसएससी ने 'झारखंड आरक्षी प्रतियोगिता परीक्षा-2015' का आयोजन विज्ञापन संख्या 4/2015 के तहत किया था। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए कुल 7,272 पदों पर नियुक्तियां की जानी थीं, जिसका परिणाम 17 दिसंबर 2016 को जारी किया गया था।
आयोग ने अपनी प्रक्रिया के तहत 4,932 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की थी, जिसके बाद राज्य सरकार द्वारा 4,892 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी किए गए। हालांकि,याचिकाकर्ताओं का मुख्य तर्क यह है कि वे भर्ती प्रक्रिया के सभी चरणों में पूरी तरह सफल रहे, फिर भी उन्हें नियुक्ति का अवसर नहीं दिया गया।
