रांची। हजारीबाग के सदर अंचल अधिकारी (सीओ)-सह-खास महाल पदाधिकारी आशुतोष के साथ हुई दुर्व्यवहार की घटना को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों में भारी आक्रोश है। यह मामला अब झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ (झासा) तक पहुंच गया है। संघ ने पूर्व मंत्री व बड़कागांव के पूर्व विधायक योगेंद्र साव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो अधिकारी कार्य बहिष्कार और चरणबद्ध आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
झासा के अनुसार यह घटना 18 सितंबर की है। सदर अंचल क्षेत्र के कैंटोनमेंट मौजा स्थित खास महाल की सरकारी जमीन पर अनधिकृत निर्माण और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर की जा रही थी। इसी दौरान पूर्व मंत्री योगेंद्र साव मौके पर पहुंचे और कथित तौर पर सीओ के साथ अभद्र व आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए सरकारी काम में बाधा डाली।
संघ ने बताया कि घटना के दिन ही संबंधित थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए लिखित आवेदन दे दिया गया था, लेकिन अब तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। झासा की केंद्रीय कार्यकारिणी ने अधिकारियों के सम्मान, सुरक्षा और मनोबल की रक्षा का मुद्दा उठाते हुए पुलिस-प्रशासन की शिथिलता पर गहरी नाराजगी जताई है।
झासा ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकारी कर्तव्य के निर्वहन के दौरान अधिकारियों को संस्थागत संरक्षण नहीं मिलता है, तो पूरे राज्य में कार्य बहिष्कार कर चरणबद्ध आंदोलन किया जाएगा। संघ ने यह भी कहा कि वह पीड़ित अधिकारी को हर स्तर पर कानूनी और संस्थागत सहयोग प्रदान करेगा।
पूर्व मंत्री ने कार्रवाई पर उठाए सवाल
दूसरी ओर इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से प्राथमिकी और आगे की कार्रवाई को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हो सकी है। वहीं, पूर्व मंत्री योगेंद्र साव ने प्रशासन की इस कार्रवाई और संबंधित जमीन के रिकॉर्ड्स पर सवाल खड़े करते हुए अपने पक्ष का बचाव किया है।
