सुधाकर

​संवेदना और इंसानियत किसी पेशे की मोहताज नहीं होती। चाहे कोई आम नागरिक हो या देश का बड़ा सेलिब्रिटी, दुःख के क्षणों में संवेदनशीलता की उम्मीद हर किसी से की जाती है। लेकिन, कल (7अक्टूबर) को रांची में जो नजारा देखने को मिला, उसने इस उम्मीद पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।

​एक तरफ झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन की स्थिति बेहद नाजुक थी और पूरे राज्य में शोक का माहौल था। मुख्यमंत्री अपने तमाम सरकारी कार्यक्रम रद्द कर अस्पताल में मां के पास थे, जहां रात करीब 8.40 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। शाम से ही यह खबर हर तरफ फैल चुकी थी कि माहौल गमगीन है।

​लेकिन दूसरी तरफ, रांची पहुंचे भारतीय क्रिकेटरों का रुख हैरान करने वाला रहा। रात नौ बजे, जब पूरा राज्य इस दुःखद खबर से स्तब्ध था, तब ये स्टार खिलाड़ी फिल्म देखने में मशगूल थे। और भी दुखद बात यह है कि झारखंड स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन के कर्ता-धर्ता, जो खुद सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा हैं, चाहते तो इस मनोरंजक कार्यक्रम को रद्द कर सकते थे। मगर ऐसा नहीं हुआ। उल्लेखनीय यह भी है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जेएससीए के मुख्य संरक्षक भी हैं।

​यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या वाकई चमक-धमक और ग्लैमर की इस दुनिया में संवेदनाओं के लिए कोई जगह नहीं बची? माना कि खेल और मनोरंजन उनका पेशा है, लेकिन जिस शहर में वे मेहमान बनकर आए हैं, वहां के मुख्य जनप्रतिनिधि के व्यक्तिगत दुःख के प्रति इतनी बेरुखी दिखाना किस हद तक जायज है?

​संवेदनाएं किसी के कहने से नहीं आतीं, वे इंसान के भीतर की नैतिकता से उपजती हैं। इस वाकये ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चकाचौंध से भरी जिंदगी जीने वाले इन सेलिब्रिटीज के लिए आम मानवीय भावनाएं शायद बहुत पीछे छूट गई हैं।