कामडारा/गुमला। चीन की धरती पर तिरंगा लहराकर देश को जूनियर महिला एशिया कप में गोल्ड मेडल दिलाने वाली हॉकी खिलाड़ी पार्वती तोपनो का परिवार आज अपने ही घर में बेबसी का जीवन जीने को मजबूर है। एक तरफ जहां पूरा देश पार्वती की ऐतिहासिक उपलब्धि पर जश्न मना रहा है, वहीं दूसरी तरफ कामडारा के कुम्हार टोली स्थित उनका आशियाना लगातार हो रही बारिश में ढह चुका है। ढही हुई मिट्टी की दीवार और बांस-लकड़ियों के सहारे किसी तरह टिके छप्पर के नीचे रहने को मजबूर इस परिवार पर अब पूरा मकान गिर जाने का खतरा मंडरा रहा है।

पार्वती के पिता सोमा तोपनो राजमिस्त्री और मजदूरी का काम करके किसी तरह परिवार का पेट पालते हैं। बेहद सीमित आमदनी के कारण परिवार के पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वे ढहे हुए मकान की मरम्मत करा सकें। पार्वती ने अपनी प्रतिभा के दम पर रांची के एकलव्य हॉस्टल में जगह बनाई और फिर चीन में 4 से 13 सितंबर तक आयोजित टूर्नामेंट में भारत का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया। गुमला जिले की इकलौती खिलाड़ी के रूप में अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का मान बढ़ाने वाली पार्वती के घर की यह बदहाली व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
ग्रामीणों में इस उपेक्षा को लेकर भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि जो बेटी देश का नाम रोशन कर रही है, उसका परिवार आज एक सुरक्षित छत के लिए तरस रहा है। प्रखंड और जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए ग्रामीणों ने मांग की है कि पार्वती के परिवार को अविलंब पक्का आवास और मुआवजा मुहैया कराया जाए।
एक तरफ देश के सीने पर चमकता गोल्ड मेडल है, तो दूसरी तरफ तिरपाल और बांस के सहारे सिसकता एक चैंपियन का घर। व्यवस्था का यह दोहरा रवैया बताता है कि मेडल की चमक के पीछे हमारे खिलाड़ियों का संघर्ष आज भी कितना अंधेरे में है।
