सरायकेला। बहुचर्चित सरायकेला को-ऑपरेटिव बैंक घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार तड़के ईडी की अलग-अलग टीमों ने केंद्रीय सुरक्षा बलों के साथ झारखंड और बिहार में स्थिति 7 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। यह कार्रवाई सरायकेला के कारोबारी संजय कुमार डालमिया उर्फ पिंटू डालमिया और सहकारिता बैंक के तत्कालीन पदाधिकारियों व कर्मचारियों से जुड़े परिसरों पर चल रही है। जांच अधिकारी मौके पर गहन छानबीन कर रहे हैं और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।

इस मामले में कारोबारी संजय डालमिया के साथ-साथ सहकारिता बैंक के तत्कालीन एजीएम संदीप सेन, शाखा प्रबंधक सुनील सतपति, कौशल कुमार सिन्हा और कर्मचारी मदन लाल प्रजापति जांच के दायरे में हैं। ये सभी पूर्व में हुई जांच में दोषी पाए जा चुके हैं और इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत ईसीआईआर (इन्फोर्समेंट केस इनफॉर्मेशन रिपोर्ट) दर्ज कर मनी ट्रेल की जांच शुरू की थी।

यह पूरा मामला को-ऑपरेटिव बैंक की विभिन्न शाखाओं से फर्जीवाड़े के जरिए बड़ी राशि के अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है। आरोप है कि कारोबारी संजय डालमिया ने बैंक के तत्कालीन अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर 3 जून 2017 और 6 जून 2017 को अपने, अपने भाई और नौकरों के खातों में कुल 43 करोड़ 14 लाख 30 हजार रुपये ट्रांसफर कराए थे। इस गबन की राशि का इस्तेमाल डालमिया ने अपने पुराने कर्ज (लोन अकाउंट) को बंद करने में किया था। बैंक से गबन का खुलासा होने के बाद 22 अगस्त 2019 को सरायकेला थाने में 38 करोड़ रुपये के गबन की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। जांच के अनुसार, आरोपियों ने कुल 38 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जिसमें से अकेले संजय डालमिया के नाम पर 33 करोड़ रुपये और बाकी 4 करोड़ रुपये अन्य आरोपियों से जुड़े थे। कर्ज लेने के बाद यह राशि बैंक को वापस नहीं लौटाई गई थी। फिलहाल ईडी की कार्रवाई से हड़कंप मचा हुआ है।