रांची। ​राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति और अपीलों की सुनवाई बाधित होने का मुद्दा अब गहराता जा रहा है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में सूचना आयोग को पूरी तरह कार्यशील न बनाए जाने पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। पत्र में कहा गया है कि आयुक्तों की नियुक्ति के बावजूद मुख्य सूचना आयुक्त का पद रिक्त रहने से नागरिकों को अपने अधिकारों के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है।

​ श्री मरांडी ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक का हवाला देते हुए याद दिलाया गया कि मुख्य सूचना आयुक्त की जल्द नियुक्ति का आश्वासन मिला था। उसी भरोसे पर नियुक्ति अनुशंसाओं पर हस्ताक्षर किए गए थे।

उच्च न्यायालय में दायर जनहित याचिका सरकार के आश्वासन के बाद ही निष्पादित हुई थी। ऐसे में अब भी काम ठप रहना न्यायालय में दिए गए आश्वासन का उल्लंघन है।

आयोग में सुनवाई न होने से 'सूचना का अधिकार' (आरटीआई) निष्प्रभावी साबित हो रहा है। समय पर जानकारी न मिलने से आरटीआई का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाता है।

​पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि​मुख्य सूचना आयुक्त के चयन हेतु संबंधित समिति की बैठक तत्काल बुलाई जाए।

​नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी कर राज्य सूचना आयोग में अपीलों और शिकायतों की नियमित सुनवाई शुरू कराई जाए।

​आयोग को कार्यशील बनाने की एक स्पष्ट समयसीमा सार्वजनिक की जाए ताकि आम जनता को बार-बार अदालत का दरवाजा न खटखटाना पड़े।