​खूंटी। वीर शहीद बिरसा मुंडा के पैतृक गांव उलिहातु स्थित “बिरसा ओड़ा” के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण कार्य में अकारण व्यवधान पैदा करना बिल्कुल उचित नहीं है। यह बात झारखंड उलगुलान संघ के संयोजक अलेस्टेयर बोदरा ने उलिहातु गांव का दौरा करने के बाद कही।

​अलेस्टेयर बोदरा ने बताया कि जब उन्हें यह सूचना मिली कि झारखंड से बाहर के किसी संगठन ने इस निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है, तो वे बुधवार को वस्तुस्थिति जानने स्वयं उलिहातु पहुंचे। वहां उन्होंने ग्राम प्रधान नेल्सन मुंडा और पूर्व वार्ड पार्षद सामुएल पूर्ति से मुलाकात कर पूरी जानकारी ली। गांव के दोनों प्रमुख प्रतिनिधियों द्वारा बताई गई बातें पेसा कानून और मुंडारी खूंटकट्टी व्यवस्था के प्रतिकूल प्रतीत होती हैं।

​बोदरा ने स्पष्ट किया कि उलिहातु गांव की पारंपरिक ग्राम सभा द्वारा विधिवत सहमति दिए जाने के बाद ही यह कार्य शुरू किया गया था और काम काफी हद तक पूरा भी हो चुका है। परंपरागत शैली में बांस से बना घर तैयार हो चुका है; अब केवल रंग-रोगन और फिनिशिंग का थोड़ा-बहुत काम बाकी है। मुख्य द्वार का निर्माण भी अंतिम चरण में है। ऐसे में जब काम लगभग पूरा होने को है, बिना किसी उचित कारण के रुकावट डालना गलत है।

​उन्होंने दुःख व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य से बाहर के लोग भगवान बिरसा मुंडा के ऐतिहासिक उलगुलानी उद्घोष “अबुआ हातु रे अबुआ राईज” (हमारे गांव में हमारा राज) को कलंकित करने का प्रयास कर रहे हैं। पारंपरिक ग्राम सभा को बिना विश्वास में लिए और स्थानीय अगुवों से सलाह-मशविरा किए बिना व्यवधान डालना वीर शहीद का अपमान करने के समान है।

​अलेस्टेयर बोदरा ने खूंटी जिला प्रशासन से मांग की है कि वह उलिहातु की पारंपरिक ग्राम सभा की बैठक में शामिल होकर शहीद बिरसा मुंडा की ऐतिहासिक गरिमा के अनुरूप विचार-विमर्श करे। साथ ही, पारंपरिक ग्राम सभा की अगुवाई में “बिरसा ओड़ा” के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण के शेष कार्य को जल्द से जल्द पूरा कराने की पहल करे।