रांची। झारखंड में स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराने की कगार पर पहुँच गई है। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने रविवार को बिगुल फूंक दिया है। राज्य भर के डॉक्टरों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए रविवार से चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत कर दी है। आईएमए ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाया, तो 22 अक्टूबर से राज्य के सभी सरकारी-निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में अनिश्चितकालीन 'कामकाज ठप' कर दिया जाएगा।

रांची में आयोजित एक विशाल संयुक्त बैठक में राज्य के सभी जिलों से भारी संख्या में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी जुटे। आईएमए का दावा है कि झारखंड के इतिहास में चिकित्सा क्षेत्र के मुद्दों को लेकर इतनी बड़ी और एकजुट बैठक पहली बार हुई है।

डॉक्टरों की मुख्य मांगों में चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम,क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट में व्यवहारिक व जनहितकारी बदलाव, डीएसीपी और डायनेमिक एसीपी लागू करना, सीनियर रेजिडेंट्स का समय पर वेतन और मैटरनिटी लीव की सुविधा और जूनियर डॉक्टरों के लिए बॉन्ड नीति में सुधार शामिल है।

27 सितंबर से आंदोलन का पहला चरण औपचारिक रूप से शुरू हो गई है।5 से 8 अक्टूबर तक व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।9 अक्टूबर को जिला, राज्य और मेडिकल कॉलेज स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सरकार को अंतिम चेतावनी दी जाएगी।10 से 20 अक्टूबर तक प्रत्येक जिले में जन-जागरूकता अभियान,21 अक्टूबर को मांगें न माने जाने पर राज्यव्यापी उग्र विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।22 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन संपूर्ण कार्य बहिष्कार होगा। संयुक्त चिकित्सा संगठनों ने राज्य सरकार से अपील की है कि स्थिति गंभीर होने से पहले बातचीत के जरिए मांगों का त्वरित समाधान निकाला जाए, वरना 22 अक्टूबर के बाद उत्पन्न होने वाले हालातों की पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।