गढ़वा। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता स्वर्गीय रूपी सोरेन के प्रति गढ़वा के भाजपा विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी द्वारा की गई कथित अमर्यादित एवं अपमानजनक टिप्पणी के विरोध में आदिवासी समाज का आक्रोश सड़कों पर दिखाई दिया। आदिवासी एकता मंच के बैनर तले हजारों आदिवासियों ने एकजुट होकर विधायक के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने टाउन हॉल से विरोध मार्च निकाला और नारेबाजी करते हुए विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के आवास का घेराव किया। इसके बाद सभी प्रदर्शनकारी रंका मोड़ पहुंचे, जहां विधायक के पुतले पर कालिख पोतकर पुतला दहन किया गया।

प्रदर्शन के दौरान आदिवासी एकता मंच के सदस्यों ने कहा कि एक बुजुर्ग और बीमार आदिवासी महिला, जो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रही थीं, उनके प्रति इस तरह की अमानवीय और असंवेदनशील टिप्पणी करना बेहद शर्मनाक है। किसी भी व्यक्ति के प्रति व्यक्तिगत दुर्भावना हो सकती है, लेकिन बीमारी और जीवन-मृत्यु जैसी संवेदनशील परिस्थिति में किसी के निधन की कामना करना मानवीय मूल्यों और सामाजिक मर्यादाओं के विरुद्ध है। जनप्रतिनिधियों से समाज हमेशा संवेदनशीलता, शालीनता और जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा करता है।

मंच के सदस्यों ने कहा कि स्वर्गीय रूपी सोरेन केवल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता नहीं थीं, बल्कि झारखंड के आदिवासी समाज के लिए सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव का विषय भी थीं। उनके प्रति कथित अपमानजनक टिप्पणी से आदिवासी समाज की भावनाएं आहत हुई हैं। राजनीतिक विरोध लोकतंत्र का अभिन्न अंग है, लेकिन विरोध के नाम पर मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक गरिमा को ठेस पहुंचाना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं ठहराया जा सकता।

आदिवासी एकता मंच ने विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी के आचरण की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें निर्लज्ज, निकम्मा और विकास विरोधी बताया। मंच के सदस्यों ने कहा कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों का दायित्व समाज को जोड़ना, जनता की समस्याओं को उठाना और लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन करना है। यदि कोई जनप्रतिनिधि अपनी भाषा और आचरण से समाज के किसी वर्ग की भावनाओं को आहत करता है, तो उसे अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।

प्रदर्शनकारियों ने झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष से मांग की कि विधायक के कथित अमर्यादित आचरण पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाए और नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाए। मंच ने विधायक की बर्खास्तगी की मांग भी उठाई। साथ ही स्पष्ट किया कि सार्वजनिक जीवन में मर्यादा, संवेदनशीलता और जवाबदेही बनाए रखना प्रत्येक जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।

आदिवासी एकता मंच ने चेतावनी दी कि यदि विधायक सत्येंद्रनाथ तिवारी सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते हैं, तो उनके खिलाफ गढ़वा से लेकर रांची तक चरणबद्ध आंदोलन चलाया जाएगा। मंच ने कहा कि यह विरोध किसी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता तक सीमित नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के सम्मान, स्वाभिमान और मानवीय गरिमा से जुड़ा विषय है।

कार्यक्रम में हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। टाउन हॉल से विधायक के आवास तक घेराव और रंका मोड़ पर पुतला दहन के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने अपना विरोध दर्ज कराया। आदिवासी एकता मंच ने दोहराया कि समाज के सम्मान और संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा तथा सार्वजनिक माफी मिलने तक लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रहेगा।