​बंदगांव (प सिंहभूम)। गरीबी और पलायन की कड़वी सच्चाई ने एक बार फिर पश्चिमी सिंहभूम के एक परिवार की उम्मीदों को रौंद दिया है। बंदगांव प्रखंड के किता गांव निवासी मजदूर दुर्गा भोगता की केरल जाने के दौरान ट्रेन से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। बेहद दुखद स्थिति यह रही कि आर्थिक तंगी के कारण परिजन अपने मृत बेटे, पति और पिता का अंतिम दर्शन तक नहीं कर सके। आखिरकार हजारों किलोमीटर दूर केरल के कलमाश्री में ही उसका अंतिम संस्कार करना पड़ा।

​दुर्गा भोगता अपने परिवार की माली हालत सुधारने और अगले वर्ष होने वाली बहन की शादी के लिए पैसे जुटाने की आस में केरल जा रहा था। परिजनों ने बताया कि वह शनिवार शाम धनबाद-एलेप्पी एक्सप्रेस से अपने साथियों के साथ रवाना हुआ था।

​रविवार तड़के करीब तीन बजे एर्नाकुलम के पास अचानक उसकी मानसिक स्थिति बिगड़ने लगी। साथियों ने उसे समझाकर सीट पर बैठाया, लेकिन कुछ ही देर बाद वह चलती ट्रेन से नीचे गिर गया। बाद में एर्नाकुलम स्टेशन के पास उसका शव बरामद हुआ।

​शव घर लाने तक के पैसे नहीं जुटा सका परिवार

​हादसे के बाद शव को गांव वापस लाना परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया। गरीबी इतनी भयावह थी कि एंबुलेंस और परिवहन के खर्च की व्यवस्था नहीं हो सकी। बिलखती पत्नी ने स्थानीय स्तर पर मदद की गुहार लगाई, जनप्रतिनिधियों और मीडिया के माध्यम से भी बात सामने आई, लेकिन शव को वापस लाने जितनी आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी।

​परिजनों की आंखों के सामने बेबसी का अंतिम संस्कार

​जब शव गांव लाने का कोई मार्ग नहीं बचा, तो केरल में रह रहे गांव के ही कुछ युवकों के सहयोग से दुर्गा के चचेरे भाई लुदु भोगता व साथियों ने कलमाश्री नगर पालिका के गैस आधारित शवदाह गृह में उसका अंतिम संस्कार कर दिया। घर पर राह तक रही पत्नी और तीन मासूम बच्चों को पिता का अंतिम चेहरा देखना भी नसीब नहीं हुआ।

​दुर्गा अपने पीछे पत्नी और तीन छोटे बच्चों को छोड़ गया है। इस घटना से किता गांव में शोक की लहर है। ग्रामीणों ने झारखंड सरकार और जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने तथा रोजगार के लिए पलायन करने वाले मजदूरों की सुरक्षा व आपात स्थिति के लिए ठोस नीतियां बनाने की मांग की है।