मेदिनीनगर। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा) के निर्देशानुसार 'बोर्ड ऑफ विजिटर' और 'जिला विधिक सेवा प्राधिकार' (डालसा) की संयुक्त टीम ने मेदिनीनगर स्थित केंद्रीय कारा का औचक निरीक्षण किया।
यह निरीक्षण पलामू के प्रभारी प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राज कुमार मिश्रा की अगुआई में किया गया।
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने जेल के विभिन्न हिस्सों—बैरक, महिला वार्ड, मुलाकाती सहायता केंद्र, मेडिकल वार्ड, किचन, स्टोर रूम, लाइब्रेरी, प्रिंटिंग प्रेस और कपड़ा बुनाई केंद्र का बारीकी से जायजा लिया।
टीम ने कैदियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं, चिकित्सा व्यवस्था, साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय, पुस्तकालय और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। इसके साथ ही सरकार द्वारा निर्धारित 'मानक मेनू' के तहत कैदियों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच की गई, जो संतोषजनक पाई गई। परिसर में पठन-पाठन की सामग्री और संगीत उपकरण भी सही स्थिति में मिले।
जांच टीम ने बंदियों से उनके मुकदमों की पैरवी और वकीलों की उपलब्धता के संबंध में जानकारी ली।
प्रभारी पीडीजे राज कुमार मिश्रा ने कहा कि कोई भी बंदी बिना अधिवक्ता के न रहे। डालसा द्वारा सभी जरूरतमंद बंदियों को नि:शुल्क अधिवक्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि किसी बंदी को कोई समस्या हो, तो वे जेल पीएलवी के माध्यम से अपनी शिकायत लिखकर डालसा को भेज सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य जेल प्रशासन की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाए रखना, कैदियों को मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित कराना और यह जांचना था कि जेल में किसी प्रकार का भेदभाव या डर का माहौल न हो।
महिला वार्ड के निरीक्षण के दौरान टीम ने महिला बंदियों से बातचीत कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान 'बोर्ड ऑफ विजिटर' की टीम ने महिला बंदियों के साथ रह रहे छोटे बच्चों के बीच बिस्कुट और टॉफी बांटे।
निरीक्षण के दौरान माहौल तब भावुक और खुशनुमा हो गया जब एक 4 साल के मासूम बच्चे ने जांच टीम को कविता और अंग्रेजी अल्फाबेट सुनाकर सभी का दिल जीत लिया।
इस औचक निरीक्षण के दौरान काराधीक्षक प्रभात कुमार, कारापाल देवनाथ राम, लीगल एड डिफेंस काउंसिल के असिस्टेंट वीर विक्रम बक्स राय व पुष्कर राज, डालसा असिस्टेंट संजीव कुमार सिंह, पीएलवी आलोक केरकेटा, नीरज सिंह और जेल के अन्य कर्मी उपस्थित थे।
